कौन सी पार्टी कितनी मजबूत? दिग्गज नेताओं का भविष्य तय करेंगे झारखंड के चुनावी नतीजे

Singh Anchala
रांची। झारखंड विधानसभा के नतीजे घोषित होने में कुछ ही घंटे का समय बांकी है ऐसे में सबकी नजरें सोमवार सुबह होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। ये नतीजे मुख्यमंत्री रघुबर दास, कैबिनेट मंत्री और निर्दलीय उम्मीदवार सरयू राय, जेवीएम नेता हेमंत सोरेन के भविष्य की रूपरेखा भी तय करेंगे। पांच चरणों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद जो एग्जिट पोल आए उनमें से ज्यादातर में दावा किया जा रहा है कि राज्य की बीजेपी सरकार की इस बार विदाई हो सकती है और झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस तथा राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सरकार बन सकती है।

क्या है विधानसभा का समीकरण
राज्य विधानसभा में कुछ 81 विधानसभा सीटें हैं और बहुमत के लिए किसी भी दल को 41 सीटें चाहिए। अधिकतर एग्जिट पोल्स कांग्रेस गठबंधन को बढ़त दिखा रहे हैं या फिर त्रिशंकु विधानसभा की बात कर रहे हैं। चुनाव से पहले भाजपा का स्थानीय आजसू के साथ गठनबंधन था जो बाद में गठबंधन से बाहर आ गई। इसके बाद भाजपा के लिए स्थितियां थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो गईं।

कितना मजबूत है गठबंधन

कांग्रेस, झामुमो और आरजेडी का गठबंधन में शुरूआत में कुछ पेंच फंसते हुए दिख रहा था लेकिन बाद में तीनों ने मजबूती से चुनाव लड़ा। बीजेपी मुख्यमंत्री रघुबर दास को आगे रखकर चुनाव लड़ी थी लेकिन उनके खिलाफ लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली थी। मुख्यमंत्री के खिलाफ खुद उनके कैबिनेट के सहयोगी सरयू राय मैदान में हैं जबकि कांग्रेस ने अपने चर्चित प्रवक्ता गौरव वल्लभ को मुख्यमंत्री के खिलाफ पार्टी का प्रत्याशी बनाया है जिससे रघुबर दास की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही है। वहीं विपक्ष ने झामुमो नेता हेमंत सोरेन को आगे रखकर चुनाव लड़ा जिसका उसे फायदा मिलता नजर आया। 

कितना सफल हो सकता है भाजपा का चुनावी नारा
भाजपा ने इस बार 'अबकी बार 65 पार' का नारा दिया था लेकिन मतदान खत्म होने के बाद आए एग्जिट पोल में यह बिल्कुल भी पूरा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। अगर त्रिशंकु विधानसभा आती है तो यहां पर बाबू लाल मरांडी का पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। मरांडी की पार्टी ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।a

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