तो क्या NRC पर अमित शाह के बयानों को पीएम मोदी ने खारिज कर दिया है?

Kumari Mausami

नागरिकता कानून (CAA) बनने के बाद से लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. हालांकि लोगों के प्रदर्शन की मुख्य वजह एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) है. देश के मुसलमानों में डर है कि उनसे नागरिकता साबित करने के लिए पुरखों के दस्तावेज मांगे जाएंगे. अगर वो दस्तावेज दिखाने में नाकाम रहे तो फिर उन्हें डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा. वहीं किसी और धर्म का नागरिक हुआ तो वो खुद को धार्मिक उत्पीड़न का शिकार बताकर यहां की नागरिकता पा लेगा.

 

 

कांग्रेस के जमाने में बनाया था, तब सोए थे क्या?

हालांकि पीएम मोदी ने एनआरसी की किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है. रविवार को रामलीला मैदान में 'आभार पीएम मोदी रैली' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'एनआरसी पर भी ऐसा झूठ चलाया जा रहा है. ये कांग्रेस के जमाने में बनाया था, तब सोए थे क्या? हमने तो बनाया नहीं? संसद में आया नहीं? न कैबिनेट में आया है? न उसके कोई नियम कायदे बने हैं? हौआ खड़ा किया जा रहा है? और मैंने पहले ही बताया इसी सत्र में आपको जमीन और घर का अधिकार दे रहे हैं, कोई धर्म-जाति नहीं पूछते हैं.. तो कोई दूसरा कानून आपको निकाल देने के लिए करेंगे क्या? बच्चों जैसी बातें करते हो.'

 

 

मेरी सरकार आने के बाद एनआरसी शब्द पर कोई चर्चा नहीं हुई

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा, 'कांग्रेस चीख-चीख कर कह रही है कि कौआ कान काटकर उड़ गया और लोग कौए को देखने लगे. पहले अपना कान तो देख लीजिए कि कौआ कान काटा कि नहीं? पहले यह तो देख लीजिए एनआरसी के ऊपर कुछ हुआ भी है क्या? झूठ चलाए जा रहे हो. मेरी सरकार आने के बाद साल 2014 से ही एनआरसी शब्द पर कोई चर्चा नहीं हुई है. कोई बात नहीं हुई है. सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के कहने पर यह असम के लिए करना पड़ा. क्या बातें कर रहे हो? झूठ फैलाया जा रहा है. कांग्रेस और उसके साथी, शहरों में रहने वाले पढ़े लिखे नक्सली -अर्बन नक्सल, ये अफवाह फैला रहे हैं कि सारे मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा.'

 

 

इससे पहले पीएम मोदी ने नागरिकता कानून को लेकर कहा, 'CAA भारत के किसी भी नागरिक के लिए नहीं है, चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान. ये संसद में भी बोला गया है और वहां पर गलत बयानबाजी की अनुमति नहीं होती है. देश के 130 करोड़ आबादी का इस कानून से कोई वास्ता नहीं है.' हालांकि लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश करने के दौरान असम में एनआरसी फेल होने के आरोप पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, 'जब हम एनआरसी लेकर आएंगे देश के अंदर एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा. किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है.'

 

 

 

एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) सांसद असदुद्दीन ओवैसी के आरोप पर अमित शाह ने आगे कहा, 'एनआरसी का कोई बैकग्राउंड बनाने की जरूरत नहीं है. हम इस पर बिल्कुल साफ हैं कि देश में एनआरसी होकर रहेगा. कोई बैक ग्राउंड बनाने की जरूरत नहीं है. हमारा घोषणा पत्र ही बैकग्राउंड है.'

 

 

वहीं राज्यसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा, 'असम में जो एनआरसी की प्रक्रिया शुरू की गई थी वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अलग तरीके से की गई है. एनआरसी की प्रक्रिया देश भर में होगी, तब असम में भी स्वभाविक रूप से यह प्रक्रिया फिर से शुरू होगी.'

 

 

उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा, 'मैं फिर से स्पष्ट कर देता हूं कि किसी भी धर्म के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है. एनआरसी में सारे लोगों को समाहित करने की व्यवस्था है.'

 

 

झारखंड में दूसरे चरण के चुनाव से पहले पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर और पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा था, 'आज मैं आपको बताना चाहता हूं कि 2024 के चुनावों से पहले देशभर में एनआरसी कराई जाएगी और हर घुसपैठिये की पहचान कर उसे निष्कासित किया जाएगा.'

 

 


इतना ही नहीं 'एजेंडा आजतक-2019' के मंच से देश के गृह मंत्री अमित शाह ने एनआरसी पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि एनआरसी में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होनी है. जो कोई भी एनआरसी के तहत इस देश का नागरिक नहीं पाया जाएगा, सबको निकालकर देश से बाहर किया जाएगा. एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा. अमित शाह ने कहा कि एनआरसी सिर्फ मुस्लिमों के लिए नहीं है.

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