जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव है. भारत सरकार के इस फैसले के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान में बौखलाहट है और वह विश्व मंच पर अपने लिए हमदर्द की तलाश कर रहा है. इसी सिलसिले में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी अपने सबसे 'भरोसेमंद दोस्त' चीन का दरवाजा खटखटाने पहुंचे.
पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया कि चीन ने माना है कि भारत के आक्रामक रुख से कश्मीर के लोग परेशान हैं और पूरे क्षेत्र के लोगों को खतरे में डाल दिया है. हालांकि चीन को लेकर पाकिस्तान के इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है. पाकिस्तान के मुताबिक वह शांति और स्थिरता लाना चाहता है, जिसका चीन ने समर्थन किया है. पाकिस्तान का कहना है कि वह चीन के साथ मिलकर कश्मीर के लोगों की आवाज के दुनिया के सामने उठाएगा.
बता दें कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इस वक्त तीन दिनों के चीन दौरे पर हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर का ये पहला चीन दौरा है. उनका ये दौरा तब हो रहा है जब पिछले सप्ताह भारत ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को खत्म करने की घोषणा की है. इसके साथ ही भारत ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा की है. बीजिंग ने भारत सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई थी. चीन का कहना है कि भारत सरकार का ये फैसला उसकी 'क्षेत्रीय अखंडता' का उल्लंघन करता है. चीन लद्दाख से सटे 'अक्साई चिन' पर अवैध दावा करता आया है. जबकि ये इलाका सालों से जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा रहा है.
सूत्र बताते हैं कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने का मुद्दा उठ सकते हैं. अनुच्छेद-370 पर चीन का बयान अब तक तो संतुलित ही रहा है, लेकिन पाकिस्तान में अपने हितों को देखते हुए चीन भारत विरोधी बयान दे सकता है. हालांकि इस वक्त अंतरराष्ट्रीय पटल पर तीन ऐसे ज्वलंत मुद्दे हैं जिनपर चीन दुनिया भर में घिर रहा है. ये मुद्दे चीन की वो तीन कमजोर नब्ज हैं, जिसकी वजह से चीन जम्मू-कश्मीर पर भारत के खिलाफ कदम उठाने में हिचकिचाएगा.
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