तुलसी गबार्ड ने गूगल पर किया 344 करोड़ का केस

Kumari Mausami
अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार की प्रबल दावेदार और पहली महिला हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड ने सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल के खिलाफ कम से कम पांच करोड़ डॉलर (344 करोड़ रुपये) का मुकदमा दर्ज कराया है।


तुलसी का आरोप है कि 2020 के उनके राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के साथ गूगल ने भेदभाव किया और उनकी अभिव्यक्ति की आजादी को बाधित किया। 38 वर्षीय गबार्ड लॉस एंजिलिस की एक संघीय अदालत में दायर मुकदमे में कहा है कि जून में पहली बहस के बाद गूगल ने उनके विज्ञापन खाते को थोड़े समय के लिए निलंबित करके उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश की। अमेरिकी प्रांत हवाई की सांसद तुलसी गबार्ड साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी के लिए दावेदारी पेश कर रही हैं।


कानूनी पत्र में गूगल के बारे में तुलसी की प्रचार समिति ने लिखा कि गूगल के इस भेदभावपूर्ण रवैया से प्रचार प्रभावित हुआ। साथ ही इसने देश भर के नीति निर्धारकों को चिंतित कर दिया है। कंपनी अपनी क्षमता का प्रयोग राजनीतिक मतभेद के लिए कर रही है और यह 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को भी प्रभावित करने वाला है।


गूगल ने दी सफाई : गूगल के प्रवक्ता जोस कास्टानेडा ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी का स्वचालित सिस्टम विज्ञापन दाता के अकाउंट से हो रही असामान्य गतिविधि को चिह्नित कर लेती है ताकि किसी तरह की धोखाधड़ी ना हो। गबार्ड के मामले में भी ऐसा ही हुआ है।


मोदी की समर्थक : तुलसी गबार्ड ने अमरीका में सबसे युवा निर्वाचित प्रतिनिधि बनने का इतिहास रचा था। तब वो 21 साल की थीं। तुलसी को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास समर्थकों में गिना जाता है। जब अमेरिकी सरकार ने साल 2002 के गुजरात दंगों की वजह से तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका आने पर प्रतिबंध लगा दिया था तो तुलसी गबार्ड उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थीं, जिन्होंने सरकार के इस फैसले की आलोचना की थी। 


छह घंटे के लिए विज्ञापन रोका : गबार्ड की चुनाव अभियान समिति के अनुसार, 27 और 28 जून को हुई पहली प्राइमरी बहस के बाद तकनीकी दिग्गज कंपनी गूगल ने उनके अभियान से जुड़े विज्ञापन का अकाउंट छह घंटे के लिए बंद कर दिया था। गूगल का यह कृत्य गबार्ड की बात संभावित वोटरों तक पहुंचाने और उनके अभियान के लिए फंड इकट्ठा करने में बाधा बना। साथ ही विज्ञापन खाते बंद होने के चलते इससे रुपया जुटाने एवं संभावित मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने की उसकी क्षमता प्रभावित हुई।


डेमोक्रेट सांसद तुलसी गबार्ड ने कहा, "अकाउंट बंद कर गूगल ने अभिव्यक्ति की आजादी का हनन किया। इससे यह भी पता चलता है कि इंटरनेट पर गूगल का प्रभुत्व अमेरिकी मूल्यों के लिए कितना खतरनाक है।"

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