61 T20I मैच, फिर भी 'ट्रायल मोड' पर — वॉशिंगटन सुंदर को भारत कब तक 'ऑडिशन' देता रहेगा?
वॉशिंगटन सुंदर ने 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं, लेकिन उन्हें न बल्लेबाज़ की पक्की जगह मिली, न गेंदबाज़ की। लाइव हिंदुस्तान के अनुसार टीम प्रबंधन अभी तक उनकी भूमिका तय नहीं कर पाया है। अक्षर पटेल और कुलदीप यादव जैसे विकल्पों के बीच सुंदर 'स्थायी अस्थायी खिलाड़ी' बने हुए हैं।
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: वॉशिंगटन सुंदर — भारतीय ऑलराउंडर, 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के अनुभवी खिलाड़ी
- क्या: 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के बावजूद सुंदर को टीम इंडिया में पक्की जगह नहीं मिली; लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार उनकी जगह ख़तरे में है
- कब: 2026 की चल रही टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला और आगामी टी20 विश्व कप 2026 के संदर्भ में
- कहाँ: भारतीय क्रिकेट टीम — मौजूदा श्रृंखलाओं में आयरलैंड व अन्य दौरों पर
- क्यों: 'भूमिका की स्पष्टता' का अभाव — टीम प्रबंधन तय नहीं कर पाया कि सुंदर मुख्य गेंदबाज़ हैं, ऑलराउंडर हैं या निचले क्रम के बल्लेबाज़; अक्षर पटेल, रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव जैसे विकल्पों की मौजूदगी
- कैसे: हर श्रृंखला से पहले चयन में अनिश्चितता, लगातार बदलती बल्लेबाज़ी स्थिति, और कोच-कप्तान समीकरण में बदलाव के कारण सुंदर कभी 'अपनी' जगह तय नहीं कर पाए
इकसठ मैच। यह संख्या किसी भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के लिए 'परिचय' का दौर पार कर चुकी होती है — यह वह मोड़ होता है जहाँ आप या तो टीम की रीढ़ हैं, या बाहर हैं। लेकिन वॉशिंगटन सुंदर इस गणित से बाहर ठहरते हैं — 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के बाद भी वे उस मुक़ाम पर खड़े हैं जहाँ हर श्रृंखला से पहले उनका नाम 'संभावित' की सूची में रहता है, 'पक्का' की सूची में नहीं। लाइव हिंदुस्तान की ताज़ा रिपोर्ट कहती है — उन्होंने टीम प्रबंधन का भरोसा अभी तक पूरी तरह नहीं जीता।
यह वाक्य जितना सादा लगता है, उतना ही क्रूर है।
ज़रा सोचिए — टेस्ट क्रिकेट में शतक लगा चुके हैं, इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 4 विकेट लेकर मैच पलटा है, आईपीएल में हर बरस अपनी उपयोगिता साबित करते हैं। फिर भी हर चयन बैठक के बाद सुंदर का नाम उस 'ग्रे ज़ोन' में आता है जहाँ न ज़ोरदार समर्थन है, न साफ़ इनकार।
असली समस्या: प्रतिभा नहीं, 'भूमिका का भूत'
वॉशिंगटन सुंदर की त्रासदी यह नहीं कि वे कम प्रतिभाशाली हैं। त्रासदी यह है कि भारतीय टी20 व्यवस्था ने कभी तय ही नहीं किया कि वे 'क्या' हैं। गेंदबाज़? तो कुलदीप यादव और अक्षर पटेल की धार के आगे उनकी ऑफ़ स्पिन 'सहायक' बनकर रह जाती है। बल्लेबाज़? तो मध्यक्रम में तिलक वर्मा, रिंकू सिंह और शिवम दुबे की भीड़ में वे 'अतिरिक्त' लगते हैं। ऑलराउंडर? तो रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल पहले से वह खाँचा भरे बैठे हैं।
संजय मांजरेकर ने हाल ही में कमेंट्री के दौरान सुंदर पर जो टिप्पणी की, वह इसी भूमिका-भ्रम की गूँज थी।
यह सिर्फ़ मांजरेकर की राय नहीं है — यह उस सामूहिक सवाल की आवाज़ है जो क्रिकेट जगत में गूँज रहा है: आख़िर 61 मैचों के बाद भी किसी खिलाड़ी को 'आज़माइशी' क्यों माना जाता है?
आँकड़ों का विरोधाभास
सुंदर के आँकड़े न तो शानदार हैं, न निराशाजनक — वे ठीक उसी 'बीच की ज़मीन' पर हैं जहाँ से न कोई दावा मज़बूत होता है, न कोई ख़ारिजी। ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ तीसरे टी20 में 49 रन की पारी ने ताक़त दिखाई, लेकिन ऐसी पारियाँ इक्का-दुक्का रहीं।
आयरलैंड दौरे पर उन्हें एक बार फिर मौक़ा मिला — लेकिन गेंदबाज़ी की अर्थव्यवस्था और बल्लेबाज़ी में निरंतरता, दोनों पर सवाल उठे।
यह ट्वीट सिर्फ़ एक प्रशंसक की हताशा नहीं, बल्कि उस व्यापक भावना का आईना है जो सुंदर के चयन को लेकर सोशल मीडिया पर हर मैच के बाद उमड़ती है।
गंभीर का 'विश्वास' बनाम चयन की 'गणित'
मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल में सुंदर को लगातार मौक़े मिले हैं — यह तथ्य लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट भी रेखांकित करती है। लेकिन मौक़ा मिलना और भरोसा मिलना — इन दोनों में एक गहरी खाई है। मौक़ा कहता है 'तुम्हें आज़मा रहे हैं', भरोसा कहता है 'तुम हमारी योजना के केंद्र में हो'। सुंदर हमेशा पहली श्रेणी में रहे।
विक्रांत गुप्ता जैसे वरिष्ठ पत्रकारों ने भी सुंदर और प्रसिद्ध कृष्णा दोनों के चयन पर सीधे सवाल उठाए हैं — और यही सवाल बोर्ड के गलियारों में भी गूँजते हैं।
वैभव सूर्यवंशी का उदय — सुंदर के लिए और संकरा रास्ता
16 साल के वैभव सूर्यवंशी का टीम में प्रवेश एक और संकेत है। जब टीम प्रबंधन इतने कम उम्र के खिलाड़ी पर दाँव लगाने को तैयार है, तो 61 मैचों के 'अनुभवी' के लिए संदेश साफ़ है — अब सिर्फ़ अनुभव से काम नहीं चलेगा, प्रभाव चाहिए।
यह ट्वीट उस तीखी विडंबना को पकड़ता है — एक ओर बेंच पर बैठा किशोर जो छक्के बरसा रहा है, दूसरी ओर अनुभवी ऑलराउंडर जिसकी भूमिका अब भी अस्पष्ट है।
टी20 विश्व कप 2026 का रोडमैप — सुंदर कहाँ?
यहीं कहानी का सबसे अहम मोड़ आता है। टी20 विश्व कप 2026 भारत के लिए बड़ा लक्ष्य है, और उसकी तैयारी में हर श्रृंखला एक 'छिपा ट्रायल' है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट में टीम प्रबंधन के भरोसे की कमी का जो ज़िक्र है, वह असल में इसी बड़ी तस्वीर का हिस्सा है — क्या सुंदर विश्व कप की पंद्रह सदस्यीय टीम में जगह पा सकते हैं?
अगर अक्षर पटेल फ़िट हैं, जडेजा उपलब्ध हैं, कुलदीप यादव लेग स्पिन का जादू बिखेर रहे हैं — तो सुंदर चौथे स्पिनर बनकर बाहर ही रहेंगे। जब तक वे गेंदबाज़ी या बल्लेबाज़ी में से किसी एक में 'अनिवार्य' साबित न हों, 62वाँ मैच भी 'ऑडिशन' ही होगा।
हाल ही में सुंदर की छक्कों भरी पारी ने श्रृंखला बराबर कराई — यह उनकी विस्फोटकता का सबूत था। लेकिन एक पारी प्रतिष्ठा बनाती है, नीति नहीं।
शुभमन गिल ने गुजरात टाइटंस को 'अकेले' फ़ाइनल तक पहुँचाया — प्रसिद्ध कृष्णा और सुंदर जैसे साथियों के साथ — यह टिप्पणी बताती है कि आईपीएल में भी सुंदर की छवि 'सहायक' की है, 'नायक' की नहीं।
असली सवाल: व्यवस्था का, खिलाड़ी का नहीं
और यहीं वह बात है जो स्कोरकार्ड नहीं बताता। वॉशिंगटन सुंदर की कहानी दरअसल भारतीय टी20 चयन व्यवस्था के उस गहरे दोष को उजागर करती है जहाँ 'भूमिका की स्पष्टता' नीति नहीं, हादसा है। जब तक प्रबंधन किसी खिलाड़ी को साफ़-साफ़ नहीं बताता कि 'तुम्हारी भूमिका यह है, इसमें महारत हासिल करो' — तब तक प्रतिभाशाली खिलाड़ी इसी धुंधलके में भटकते रहेंगे।
सुंदर अकेले नहीं हैं इस जाल में — लेकिन 61 मैचों का उनका अनुभव इस जाल को सबसे साफ़ दिखाता है।
अगली श्रृंखला फिर आएगी, टीम की घोषणा फिर होगी, और वॉशिंगटन सुंदर का नाम फिर उस लकीर पर होगा जहाँ 'अंदर' और 'बाहर' के बीच का फ़ासला एक चयनकर्ता की कलम की नोक जितना पतला है। सवाल यह नहीं कि सुंदर में प्रतिभा है या नहीं — सवाल यह है कि क्या भारतीय क्रिकेट प्रतिभा को पहचानने और 'जगह देने' में अंतर समझता भी है?
आँकड़ों में
- वॉशिंगटन सुंदर ने 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं — फिर भी पक्की जगह नहीं (लाइव हिंदुस्तान)
- ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ तीसरे टी20 में सुंदर ने 49 रन बनाए
- इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सुंदर ने 4 विकेट लिए (4/22)
मुख्य बातें
- लाइव हिंदुस्तान के अनुसार वॉशिंगटन सुंदर 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के बावजूद टीम प्रबंधन का पूरा भरोसा नहीं जीत पाए हैं
- अक्षर पटेल, रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव जैसे विकल्पों के कारण सुंदर की भूमिका अस्पष्ट बनी हुई है — न पक्के गेंदबाज़, न पक्के बल्लेबाज़
- संजय मांजरेकर और विक्रांत गुप्ता जैसे जानकारों ने सुंदर के चयन पर सीधे सवाल उठाए हैं
- 16 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के आगमन ने सुंदर के लिए प्रतिस्पर्धा और कड़ी कर दी है
- टी20 विश्व कप 2026 की तैयारी में हर श्रृंखला 'छिपा ट्रायल' है — सुंदर की जगह पक्की करना मुश्किल दिख रहा है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वॉशिंगटन सुंदर ने कितने टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं?
लाइव हिंदुस्तान के अनुसार वॉशिंगटन सुंदर ने 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें टीम में पक्की जगह नहीं मिल सकी है।
वॉशिंगटन सुंदर को टीम में जगह क्यों नहीं मिल रही?
मुख्य कारण 'भूमिका की स्पष्टता' का अभाव है — टीम प्रबंधन ने तय नहीं किया कि वे गेंदबाज़ हैं, बल्लेबाज़ हैं या ऑलराउंडर। अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और जडेजा जैसे विकल्प पहले से मौजूद हैं।
क्या वॉशिंगटन सुंदर टी20 विश्व कप 2026 की टीम में होंगे?
फ़िलहाल अनिश्चित है। अगर अक्षर पटेल, जडेजा और कुलदीप यादव फ़िट रहे तो सुंदर के लिए पंद्रह सदस्यीय टीम में जगह बनाना कठिन होगा, जब तक वे किसी एक भूमिका में ख़ुद को 'अनिवार्य' साबित न करें।
वॉशिंगटन सुंदर का आईपीएल 2026 में प्रदर्शन कैसा रहा?
सुंदर आईपीएल में लगातार अपनी उपयोगिता साबित करते रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी रही है।