कश्मीर में 'शिंदे मॉडल' का डर — उमर अब्दुल्ला के NC में वो 'घर का भेदी' कौन है?

Singh Anchala

उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि बीजेपी नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ने की साज़िश रच रही है — ठीक वैसे ही जैसे 2022 में शिवसेना को तोड़ा गया। NC के जम्मू विंग में असंतोष और स्टेटहुड न मिलने की निराशा ने इस डर को ज़मीन दी है। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर स्टेटहुड की माँग दोहराई।

महाराष्ट्र में 2022 का वो मंज़र याद कीजिए — एक दिन उद्धव ठाकरे के पास पूरी शिवसेना थी, अगले दिन एकनाथ शिंदे ने आधी से ज़्यादा पार्टी अपनी जेब में डाल ली। न कोई चुनाव हारा, न कोई जनमत संग्रह हुआ — बस होटलों में एमएलए शिफ़्ट हुए और सत्ता पलट गई। अब यही डर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दिल में घर कर गया है।

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, NC अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की माँग दोहराई है। लेकिन इस प्रदर्शन के पीछे सिर्फ़ स्टेटहुड का सवाल नहीं है — असली कहानी उमर अब्दुल्ला के उस आरोप में छिपी है कि बीजेपी नेशनल कॉन्फ्रेंस को अंदर से तोड़ने की तैयारी कर रही है।

यह आरोप हवा में नहीं उछाला गया। कश्मीर की राजनीति को क़रीब से समझने वाले जानते हैं कि NC कोई एकरस पार्टी नहीं है — इसके दो स्पष्ट चेहरे हैं। एक कश्मीर घाटी का चेहरा, जो अब्दुल्ला परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है और जहाँ पार्टी की असली पकड़ है। दूसरा जम्मू का चेहरा, जहाँ NC हमेशा से कमज़ोर रही है और जहाँ बीजेपी का सामाजिक आधार मज़बूत है। सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यही है कि बीजेपी की नज़र NC के जम्मू विंग के उन नेताओं पर है जो वैचारिक रूप से घाटी-केंद्रित नेतृत्व से असहज रहे हैं।

एक बात ग़ौर करने लायक़ है — जम्मू-कश्मीर अभी भी केंद्र शासित प्रदेश है, पूर्ण राज्य नहीं। इसका मतलब है कि लेफ़्टिनेंट गवर्नर के पास असाधारण शक्तियाँ हैं, और निर्वाचित सरकार का दायरा सीमित है। उमर अब्दुल्ला की सरकार चलती तो है, लेकिन एक हाथ हमेशा बँधा हुआ है। ऐसे में NC के भीतर का वो धड़ा जो सत्ता के असली गलियारों — यानी दिल्ली — से सीधा संवाद चाहता है, उसके लिए बीजेपी एक तैयार रास्ता है।

पॉलिटिकल पल्स

ट्रेड हलकों में चर्चा है कि NC के कम से कम दो-तीन वरिष्ठ नेता ऐसे हैं जो जम्मू क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं और जिनकी बीजेपी नेतृत्व से 'अनौपचारिक' बातचीत होती रही है। नाम लेना मुश्किल है, लेकिन पार्टी के अंदर के लोग मानते हैं कि देवेंदर राणा जैसे नेताओं का बीजेपी में जाना (जो 2021 में हो चुका है) कोई अपवाद नहीं था — वो एक पैटर्न की शुरुआत था। सियासी विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर स्टेटहुड का मुद्दा और लटकता रहा, तो NC के जम्मू बेस में और बड़ी टूट आ सकती है। (यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

शिंदे मॉडल — ब्लूप्रिंट तैयार है?

बीजेपी का 'ऑपरेशन लोटस' कोई रहस्य नहीं रहा। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिराई, महाराष्ट्र में शिवसेना तोड़ी, एनसीपी का विभाजन कराया — यह सब दस्तावेज़ी इतिहास है। सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर में यह कितना आसान होगा? News18 के अनुसार, फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने दिल्ली के विरोध प्रदर्शन में साफ़ कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना ही चाहिए — यह सिर्फ़ एक माँग नहीं, बल्कि NC को एकजुट रखने का सीमेंट भी है। जब तक स्टेटहुड नहीं मिलता, अब्दुल्ला परिवार के पास अपने कार्यकर्ताओं को यही बताने का मौक़ा है कि 'देखो, दिल्ली हमें कमज़ोर रखना चाहती है।'

लेकिन यही स्टेटहुड NC की कमज़ोरी भी है। अगर बीजेपी कभी स्टेटहुड दे दे — और कुछ विश्लेषक मानते हैं कि यह 2027 के आम चुनावों से पहले एक 'मास्टरस्ट्रोक' हो सकता है — तो NC के पास अपना सबसे बड़ा मुद्दा ही नहीं बचेगा। और तब पार्टी के भीतर वो दरारें जो अभी स्टेटहुड की लड़ाई के नीचे दबी हैं, सतह पर आ सकती हैं।

उमर का असली ख़तरा — बाहर नहीं, भीतर है

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यही कहता है कि उमर अब्दुल्ला का सबसे बड़ा ख़तरा बीजेपी नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर का वो असंतोष है जो दशकों से दबा हुआ है। NC एक परिवार-केंद्रित पार्टी है — शेख़ अब्दुल्ला से फ़ारूक़ और फ़ारूक़ से उमर। तीसरी पीढ़ी तक सत्ता एक ही ख़ानदान में है। जम्मू क्षेत्र के नेता, ग़ैर-अब्दुल्ला कश्मीरी नेता — सबके मन में यह सवाल है कि उनकी बारी कब आएगी।

बीजेपी को इस सवाल का जवाब देने की ज़रूरत नहीं — बस इसे ज़ोर से पूछने भर की ज़रूरत है। और वो काम वो चुपचाप कर रही है।

बीजेपी की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या देखें

आने वाले हफ़्तों में तीन चीज़ों पर नज़र रखिए: पहला, क्या NC के किसी वरिष्ठ जम्मू नेता की दिल्ली यात्रा होती है जो पार्टी लाइन से अलग दिखे। दूसरा, स्टेटहुड पर केंद्र सरकार का कोई नया संकेत — अगर केंद्र ने कोई कमेटी बनाई या 'समीक्षा' की बात की, तो समझिए कि खेल शुरू हो गया। तीसरा, NC विधायक दल की बैठकों में उपस्थिति — महाराष्ट्र में शिंदे खेमे की पहली निशानी यही थी कि विधायक बैठकों से ग़ायब होने लगे थे।

कश्मीर की सियासत में एक पुरानी कहावत है — 'बर्फ़ के नीचे दरिया बहता है।' उमर अब्दुल्ला को पता है कि दरिया बह रहा है। सवाल बस यह है कि बर्फ़ कब टूटेगी — और टूटेगी तो किसके पैरों तले।

आरोप यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से प्रस्तुत किए गए हैं और जब तक कोई अदालत फ़ैसला न दे, अप्रमाणित हैं; न्यायाधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

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मुख्य बातें

  • उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि बीजेपी नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ने की कोशिश कर रही है — News18 के अनुसार
  • NC का जम्मू विंग पार्टी की सबसे कमज़ोर कड़ी है, जहाँ बीजेपी का सामाजिक आधार पहले से मज़बूत है — राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार
  • 2021 में देवेंदर राणा जैसे NC नेताओं का बीजेपी में जाना एक पैटर्न की शुरुआत थी, अपवाद नहीं
  • स्टेटहुड NC का सबसे बड़ा हथियार है — अगर बीजेपी ने यह दे दिया तो पार्टी का सबसे बड़ा एकजुट करने वाला मुद्दा ही ख़त्म हो जाएगा
  • बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है

आँकड़ों में

  • 2021 में NC के वरिष्ठ नेता देवेंदर राणा बीजेपी में शामिल हुए — यह जम्मू विंग से पहला बड़ा 'एग्ज़िट' था
  • महाराष्ट्र (2022), कर्नाटक, और एनसीपी — बीजेपी ने कम से कम तीन राज्यों में विपक्षी दलों को तोड़कर सत्ता हासिल की है

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: जम्मू-कश्मिर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला — News18 के अनुसार
  • क्या: उमर ने आरोप लगाया कि बीजेपी NC को तोड़ने की कोशिश कर रही है, फ़ारूक़ ने दिल्ली में स्टेटहुड की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया — News18 के अनुसार
  • कब: जून 2026 — News18 रिपोर्ट के अनुसार
  • कहाँ: दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक बिसात पर — News18 के अनुसार
  • क्यों: स्टेटहुड बहाली न होना, NC के जम्मू विंग में बीजेपी के प्रति सहानुभूति रखने वाले नेताओं की मौजूदगी और महाराष्ट्र में शिवसेना स्प्लिट का सफल मॉडल — विश्लेषकों के अनुसार
  • कैसे: बीजेपी पर आरोप है कि वह NC के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क कर रही है और स्टेटहुड जैसे मुद्दे पर सरकार की विफलता को NC के भीतर दरार बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है — सियासी विश्लेषकों के अनुसार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी पर क्या आरोप लगाया है?

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि बीजेपी नेशनल कॉन्फ्रेंस को अंदर से तोड़ने की कोशिश कर रही है, ठीक वैसे ही जैसे महाराष्ट्र में शिवसेना को तोड़ा गया।

शिंदे मॉडल क्या है और कश्मीर में कैसे लागू हो सकता है?

2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के बहुमत विधायकों को अपने साथ लेकर पार्टी तोड़ दी और बीजेपी समर्थन से सरकार बनाई। विश्लेषकों के अनुसार, बीजेपी NC के जम्मू विंग के असंतुष्ट नेताओं के ज़रिए ऐसा ही कुछ कश्मीर में दोहरा सकती है।

NC के जम्मू विंग में असंतोष क्यों है?

NC परंपरागत रूप से अब्दुल्ला परिवार और कश्मीर घाटी केंद्रित पार्टी रही है। जम्मू क्षेत्र के नेताओं को लगता है कि उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। 2021 में देवेंदर राणा जैसे नेताओं का बीजेपी में जाना इसी असंतोष का संकेत था।

फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने दिल्ली में क्या माँग की?

News18 के अनुसार, फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की माँग की।

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