ट्रंप की 'हत्या की साज़िश' और मोसाद की फाइल — क्या अमेरिका को ईरान से भिड़ाने के लिए इज़रायल ने बिछाया जाल?
इज़रायल ने अमेरिका को ईरान द्वारा ट्रंप की हत्या की ताज़ा साज़िश की खुफिया जानकारी दी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ यह इंटेल तब शेयर की गई जब अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता जारी थी — जो इज़रायल की कूटनीतिक चाल पर गंभीर सवाल उठाता है।
एक तरफ़ जिनीवा में अमेरिकी और ईरानी डिप्लोमैट चाय की चुस्कियाँ ले रहे हैं, दूसरी तरफ़ मोसाद का एक कूरियर वॉशिंगटन में एक फ़ाइल थमा रहा है — 'ईरान आपके राष्ट्रपति को मारना चाहता है।' यह टाइमिंग महज़ इत्तेफ़ाक़ है, ऐसा मानना उतना ही भोलापन होगा जितना यह विश्वास कि मिडिल ईस्ट में कोई भी ख़ुफ़िया जानकारी 'बिना मक़सद' लीक होती है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ इज़रायल ने अमेरिका को ताज़ा खुफिया जानकारी दी है कि ईरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की सक्रिय साज़िश रच रहा है। ट्रंप ने ख़ुद पुष्टि करते हुए कहा कि वे ईरान की 'हर एक लिस्ट' में हैं। हिंदुस्तान टाइम्स ने भी बताया कि इज़रायली इंटेलिजेंस ने ईरानी ऑपरेटिव्स की गतिविधियों का विस्तृत डोज़ियर अमेरिकी एजेंसियों को सौंपा।
लेकिन असली कहानी यह नहीं कि ईरान ट्रंप को मारना चाहता है या नहीं — असली कहानी यह है कि यह जानकारी अभी क्यों दी गई। ठीक उस पल जब अमेरिका और ईरान परमाणु समझौते की एक नई ड्राफ़्ट पर बातचीत कर रहे थे। द प्रिंट की रिपोर्ट ने एक और विस्फोटक ख़ुलासा किया — न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से बताया गया कि अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों को यक़ीन था कि इज़रायल ईरानी वार्ताकारों की हत्या की योजना बना रहा था, ठीक उसी दौर में जब बातचीत चल रही थी। यानी एक तरफ़ इज़रायल कह रहा है कि ईरान ट्रंप को मारेगा, दूसरी तरफ़ ख़ुद ईरानी नेगोशिएटर्स को ख़त्म करने की तैयारी कर रहा था।
यह दोहरा खेल समझने के लिए नेतन्याहू की राजनीतिक मजबूरी समझनी होगी। इज़रायल के लिए अमेरिका-ईरान के बीच कोई भी समझौता एक रणनीतिक आपदा है। अगर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव घटता है, तो इज़रायल मिडिल ईस्ट में अपनी सबसे बड़ी बारगेनिंग चिप खो देता है — वह 'ईरानी ख़तरा' जो दशकों से अमेरिकी हथियारों की सप्लाई, कूटनीतिक कवर और संयुक्त राष्ट्र में वीटो की गारंटी रहा है।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि नेतन्याहू ने इस इंटेल की टाइमिंग को 'माइक्रो-कैलिब्रेट' किया। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर अमेरिका-ईरान वार्ता सफल होती, तो इज़रायल को ग़ज़ा और लेबनान में अपने सैन्य अभियानों के लिए अमेरिकी समर्थन मिलना और मुश्किल हो जाता। ट्रंप जैसे नेता के लिए जो ख़ुद को 'टफ़ लीडर' के तौर पर पेश करते हैं, यह बताना कि आपकी जान ख़तरे में है — सीधे उनके ईगो और सुरक्षा-चिंता दोनों को ट्रिगर करता है।
(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
News18 की रिपोर्ट ने ब्योरा दिया कि इज़रायली इंटेलिजेंस का दावा है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के प्रॉक्सी नेटवर्क के ज़रिए यह साज़िश रची जा रही थी। लेकिन यह पहली बार नहीं है। 2024 में भी ईरान पर ट्रंप की हत्या की साज़िश के आरोप लगे थे — और हर बार यह आरोप उस वक़्त सामने आया जब अमेरिका-ईरान के बीच कोई कूटनीतिक प्रगति हो रही थी।
तेहरान की तरफ़ से तस्वीर और भयावह है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ आयतुल्लाह ख़ामेनेई के जनाज़े के दौरान भीड़ ने ट्रंप के विशाल बैनर पर पत्थर बरसाए और 'डेथ टू डोनाल्ड' के नारे लगाए। ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक जहाज़ पर हमले के बाद चेतावनी भी दी कि उसकी 'रेड लाइन्स' को नज़रअंदाज़ न किया जाए — जो दर्शाता है कि तेहरान भी अपनी तरफ़ से दबाव बना रहा है।
इंडिया हेराल्ड का मानना है कि इस पूरी बिसात को केवल 'इज़रायल बनाम ईरान' के चश्मे से देखना अधूरा होगा। असल में यह एक तिकोनी कूटनीतिक शतरंज है — जिसमें हर खिलाड़ी दूसरे की चाल को अपने फ़ायदे में बदलना चाहता है। इज़रायल ट्रंप के व्यक्तिगत ख़तरे का हवाला देकर अमेरिका को भावनात्मक रूप से बाँधना चाहता है, ईरान 'शहीद' की नैरेटिव से अपनी घरेलू राजनीति मज़बूत कर रहा है, और ट्रंप इसे अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' इमेज के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
भारत के लिए यह मामला सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय समाचार नहीं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से भारत का 60% से अधिक कच्चा तेल आयात गुज़रता है। अगर अमेरिका-ईरान टकराव बढ़ता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल की क़ीमतें और रुपये पर सीधा असर पड़ेगा। चाबहार बंदरगाह — जो भारत का अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँचने का रास्ता है — भी अमेरिकी प्रतिबंधों की ज़द में आ सकता है।
ईरान की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पहले भी ईरान ने ट्रंप की हत्या की साज़िश के आरोपों को 'ज़ायोनिस्ट प्रोपेगंडा' करार दिया था।
आने वाले हफ़्तों में देखना यह होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन इस इंटेल को ईरान पर नए प्रतिबंधों या सैन्य कार्रवाई के बहाने के तौर पर इस्तेमाल करता है — या फिर वार्ता की मेज़ पर एक दबाव-कार्ड की तरह। अगर पहला रास्ता चुना गया, तो नेतन्याहू का दांव सफल माना जाएगा। अगर दूसरा, तो इज़रायल को अपनी अगली चाल और तेज़ चलनी होगी।
असली सवाल यह नहीं कि ईरान ट्रंप को मारना चाहता है या नहीं — सवाल यह है कि इज़रायल को अभी, इसी पल, दुनिया को यह बताने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
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मुख्य बातें
- इज़रायल ने अमेरिका को ईरान द्वारा ट्रंप की हत्या की ताज़ा साज़िश की ख़ुफ़िया जानकारी दी — ठीक उस वक़्त जब अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता चल रही थी (टाइम्स ऑफ़ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स)।
- द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिकी एजेंसियों को यक़ीन था कि इज़रायल ख़ुद ईरानी वार्ताकारों की हत्या की योजना बना रहा था — दोहरा खेल का गंभीर संकेत।
- भारत के लिए ख़तरा सीधा — होर्मुज़ से 60%+ तेल आयात, चाबहार बंदरगाह परियोजना और रुपये की स्थिरता दांव पर।
- ईरान की ओर से आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं — पहले इन्हें 'ज़ायोनिस्ट प्रोपेगंडा' बताया गया था।
आँकड़ों में
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य से भारत का 60% से अधिक कच्चा तेल आयात गुज़रता है
- 2024 के बाद यह कम से कम दूसरा मौक़ा है जब ईरान पर ट्रंप की हत्या की साज़िश का आरोप ठीक कूटनीतिक प्रगति के दौर में लगा
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अमेरिकी प्रशासन को जानकारी दी; ईरान पर आरोप और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निशाने पर — टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट।
- क्या: इज़रायल ने अमेरिका को ताज़ा खुफिया जानकारी दी कि ईरान ट्रंप की हत्या की साज़िश रच रहा है — हिंदुस्तान टाइम्स।
- कब: जून-जुलाई 2026 में, ठीक उस दौर में जब अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता चल रही थी — द प्रिंट।
- कहाँ: खुफिया जानकारी इज़रायल से वॉशिंगटन तक पहुँचाई गई; साज़िश का कथित केंद्र तेहरान — टाइम्स ऑफ़ इंडिया।
- क्यों: टाइम्स ऑफ़ इंडिया के विश्लेषण के अनुसार, इज़रायल शांति वार्ता को पटरी से उतारकर अमेरिका को ईरान के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए मजबूर करना चाहता था।
- कैसे: इज़रायली इंटेलिजेंस ने ईरानी ऑपरेटिव्स की कथित गतिविधियों का डोज़ियर अमेरिकी समकक्षों को सौंपा, जिसमें ट्रंप को निशाना बनाने की योजना का ज़िक्र था — News18, हिंदुस्तान टाइम्स।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इज़रायल ने अमेरिका को ट्रंप की हत्या की ख़ुफ़िया जानकारी कब और क्यों दी?
जून-जुलाई 2026 में, ठीक उस दौर में जब अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता चल रही थी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ इज़रायल ने ईरानी ऑपरेटिव्स की गतिविधियों का डोज़ियर अमेरिकी एजेंसियों को सौंपा।
क्या ईरान सच में ट्रंप की हत्या की साज़िश रच रहा है?
इज़रायली इंटेलिजेंस का दावा है कि IRGC के प्रॉक्सी नेटवर्क के ज़रिए साज़िश रची जा रही थी (News18)। हालाँकि ईरान ने पहले ऐसे आरोपों को 'ज़ायोनिस्ट प्रोपेगंडा' बताया है। ताज़ा आरोपों पर ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई।
इस टकराव का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत का 60% से अधिक कच्चा तेल होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आता है। अमेरिका-ईरान टकराव बढ़ने पर तेल क़ीमतें, रुपये की स्थिरता और चाबहार बंदरगाह परियोजना सीधे प्रभावित हो सकती है।
क्या इज़रायल ने ईरानी वार्ताकारों की हत्या की भी योजना बनाई थी?
द प्रिंट की रिपोर्ट (न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से) के मुताबिक़ अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों को यक़ीन था कि इज़रायल ईरानी वार्ताकारों की हत्या की योजना बना रहा था — ठीक उसी दौर में जब बातचीत चल रही थी।