ममता का 'दिल्ली दरबार' ढहा — तीन सांसदों की बगावत के पीछे अभिषेक vs ओल्ड गार्ड का खेल क्या है?
सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने TMC से इस्तीफा देकर कोलकाता में BJP की सदस्यता ली। The Hindu के अनुसार, तीनों को तुरंत राज्यसभा उपचुनाव का टिकट दिया गया — यह अभिषेक बनर्जी बनाम पुराने नेताओं की अंदरूनी जंग और BJP की ऊपरी सदन रणनीति दोनों का परिणाम है।
तीन राज्यसभा सांसद — एक साथ, एक दिन में, बिना किसी ड्रामे या प्रेस वॉर के — चुपचाप TMC का घर छोड़कर BJP के दरवाज़े पर खड़े हो गए, और दरवाज़ा पहले से खुला मिला। यह बगावत नहीं, यह ऑपरेशन था। The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने कोलकाता में BJP की सदस्यता ली — और घंटों के भीतर तीनों को राज्यसभा उपचुनाव का टिकट थमा दिया गया। इतनी तेज़ी सिर्फ़ तभी संभव है जब स्क्रिप्ट पहले से लिखी हो।
सवाल यह नहीं कि ये तीनों BJP में क्यों गए — सवाल यह है कि TMC ने इन्हें जाने क्यों दिया, और BJP ने इन्हें इतनी गर्मजोशी से क्यों गले लगाया। दोनों सवालों का जवाब एक ही नाम में छिपा है: अभिषेक बनर्जी।
अभिषेक बनर्जी का उभार और ओल्ड गार्ड की बेचैनी
TMC के भीतर पिछले कुछ वर्षों में जो सबसे बड़ा बदलाव हुआ है, वह ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का पार्टी संगठन पर बढ़ता कब्ज़ा है। Times of India के अनुसार, सुखेंदु शेखर राय जैसे वरिष्ठ नेता लंबे समय से पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज़ थे। सुखेंदु राय, जो दशकों तक ममता बनर्जी के करीबी रहे और पार्टी की विचारधारा को आवाज़ देते रहे, अभिषेक गुट के सामने खुद को हाशिए पर पाते गए। यह वही कहानी है जो कांग्रेस में राहुल गांधी के उभार के साथ पुराने नेताओं के साथ दोहराई गई — पारिवारिक उत्तराधिकार का तर्क जब संगठनात्मक ताक़त बन जाता है, तो अनुभव को कोने में बैठना पड़ता है।
सुष्मिता देव का मामला और भी दिलचस्प है। India Today के अनुसार, वे 2021 में कांग्रेस छोड़कर TMC में आई थीं — तब उन्हें राज्यसभा की सीट और महिला विंग की कमान दी गई थी। लेकिन पार्टी के भीतर असल शक्ति अभिषेक बनर्जी और उनकी टीम के पास केंद्रित होती गई। एक नेता जो कांग्रेस में अपनी आवाज़ के लिए जानी जाती थीं, TMC में भी वही चुप्पी झेलने लगीं। प्रकाश चिक बराइक — झारखंड के आदिवासी चेहरे — की स्थिति भी मिलती-जुलती रही; Hindustan Times के अनुसार, उनकी पार्टी में भूमिका सिमटती गई।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि यह पलायन अचानक नहीं हुआ। BJP नेतृत्व और इन तीनों नेताओं के बीच बातचीत कई हफ़्ते पहले से चल रही थी। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सुखेंदु राय ने कई बार ममता बनर्जी से सीधे अभिषेक की कार्यशैली पर शिकायत की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। ट्रेड हलकों में चर्चा यह भी है कि BJP ने इन नेताओं को सिर्फ़ राज्यसभा सीट नहीं, बंगाल में 'ममता विरोधी मोर्चे' का सम्मानजनक चेहरा बनने का वादा किया। (यह पार्टी हलकों की चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
अमित शाह का राज्यसभा मास्टरप्लान
अब दूसरा कोण — जो शायद ज़्यादा अहम है। NDTV के अनुसार, तीनों के इस्तीफे से राज्यसभा में तीन सीटें खाली हुईं, और BJP ने तुरंत इन्हीं को अपना उम्मीदवार बना दिया। News18 की रिपोर्ट बताती है कि यह कदम BJP की ऊपरी सदन में संख्या बल बढ़ाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। राज्यसभा में जहाँ हर वोट गिना जाता है — खासकर संविधान संशोधन बिलों और विवादास्पद विधेयकों के लिए — ये तीन सीटें BJP के लिए सोने में सुहागा हैं।
गणित साफ़ है: पश्चिम बंगाल विधानसभा में BJP के पास पर्याप्त विधायक हैं कि उपचुनाव में इन तीनों को जिताया जा सके। यानी TMC को दोहरा नुकसान — पहले सांसद गए, फिर वही सीटें BJP की झोली में। यह वही 'ऑपरेशन कमल' है जो कर्नाटक, गोवा और मध्य प्रदेश में देखा गया — बस इस बार मैदान बंगाल है और हथियार राज्यसभा की गणित है।
ममता के लिए असली ख़तरा कहाँ है?
ममता बनर्जी के लिए तीन सांसदों का जाना सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव नहीं बदलता — लेकिन इसका संकेत कहीं गहरा है। जो पार्टी दूसरों के 'दलबदल' को लोकतंत्र का हनन बताती रही, उसी के अपने लोग दूसरे दल में जा रहे हैं। Telangana Today के अनुसार, BJP नेतृत्व ने इस शामिल होने को 'ममता राज में बढ़ती तानाशाही' का प्रतीक बताया। इंडिया हेराल्ड का विश्लेषण यह कहता है कि असली ख़तरा ममता के लिए यह नहीं कि तीन लोग गए — असली ख़तरा यह है कि यह 'ट्रैफ़िक' अब एकतरफ़ा हो गया है। 2021 में कांग्रेस-लेफ्ट-BJP सबसे नेता TMC में आ रहे थे; 2026 में TMC से लोग बाहर जा रहे हैं। यह बहाव की दिशा बदलना किसी भी पार्टी के लिए सबसे ख़तरनाक संकेत है।
और अभिषेक बनर्जी? उनके लिए यह शॉर्ट-टर्म में राहत है — विरोधी आवाज़ें कम हुईं — लेकिन लॉन्ग-टर्म में यह उनकी छवि पर सवाल खड़े करता है। अगर आपके नेतृत्व में पार्टी के बड़े लोग भागते हैं, तो 'युवा ऊर्जा' का नैरेटिव कब तक टिकेगा?
आगे क्या देखें
राज्यसभा उपचुनाव अब औपचारिकता हैं — BJP की संख्या बल के आगे TMC इन सीटों पर मुक़ाबला करने की स्थिति में नहीं है। लेकिन असली खेल 2026 के बाकी महीनों में खुलेगा। क्या और TMC नेता बाहर निकलेंगे? क्या ममता अभिषेक पर लगाम लगाएँगी या उन्हें और खुली छूट देंगी? और क्या BJP बंगाल में इस 'ओल्ड गार्ड ब्रिगेड' को ज़मीनी ताक़त में बदल पाएगी या ये सिर्फ़ राज्यसभा के शोपीस बनकर रह जाएँगे?
एक बात तय है — अमित शाह ने बिना कोई चुनावी लड़ाई लड़े, बिना सड़क पर एक पोस्टर लगवाए, बस टाइमिंग और गणित से राज्यसभा में तीन सीटें हासिल कर लीं। और ममता बनर्जी का वह 'दिल्ली दरबार' — जहाँ कभी दूसरी पार्टियों से नेता खींचकर लाए जाते थे — अब उसकी खिड़कियों से अपने ही लोग बाहर कूद रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह खिड़की अब और चौड़ी होगी?
आरोपों की यहाँ रिपोर्टिंग नामित स्रोतों के हवाले से है और जब तक अदालत निर्णय नहीं देती, ये अप्रमाणित हैं; न्यायाधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक — तीनों पूर्व TMC राज्यसभा सांसदों ने एक ही दिन BJP जॉइन की और तुरंत राज्यसभा उपचुनाव का टिकट पाया
- TMC में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते वर्चस्व ने पुराने और वरिष्ठ नेताओं को हाशिए पर धकेला — यही इस पलायन की मूल वजह
- BJP ने बिना कोई ज़मीनी चुनाव लड़े राज्यसभा में तीन सीटें हासिल करने का रास्ता बनाया — यह 'ऑपरेशन कमल' का ऊपरी सदन संस्करण है
- 2021 में TMC में नेता आ रहे थे, 2026 में जा रहे हैं — बहाव की दिशा बदलना ममता के लिए सबसे चिंताजनक संकेत
आँकड़ों में
- तीन राज्यसभा सांसदों ने एक ही दिन TMC छोड़कर BJP जॉइन की — The Hindu के अनुसार
- शामिल होने के घंटों के भीतर तीनों को राज्यसभा उपचुनाव का BJP उम्मीदवार घोषित किया गया — News18 के अनुसार
- 2021 में कांग्रेस छोड़कर TMC आई थीं सुष्मिता देव, अब 2026 में TMC छोड़कर BJP में — India Today के अनुसार
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: पूर्व TMC राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक — India Today के अनुसार
- क्या: तीनों ने TMC और राज्यसभा से इस्तीफा देकर BJP की सदस्यता ली और तुरंत राज्यसभा उपचुनाव के लिए BJP उम्मीदवार घोषित किए गए — News18 के अनुसार
- कब: जुलाई 2026 में कोलकाता में — Hindustan Times के अनुसार
- कहाँ: कोलकाता, पश्चिम बंगाल में BJP कार्यालय — Telangana Today के अनुसार
- क्यों: TMC के भीतर अभिषेक बनर्जी गुट के बढ़ते वर्चस्व और पुराने नेताओं की हाशिए पर जाने की कसक — Times of India के अनुसार
- कैसे: तीनों ने पहले राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया, फिर कोलकाता में BJP नेतृत्व की उपस्थिति में पार्टी जॉइन की; BJP ने घंटों के भीतर उन्हें राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया — NDTV के अनुसार
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने TMC क्यों छोड़ी?
Times of India और India Today की रिपोर्ट के अनुसार, TMC में अभिषेक बनर्जी गुट के बढ़ते वर्चस्व और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है। तीनों नेता पार्टी में अपनी भूमिका सिमटने से नाराज़ थे।
BJP को राज्यसभा में इससे क्या फ़ायदा होगा?
NDTV और News18 के अनुसार, तीनों के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव होगा, जहाँ BJP ने इन्हीं को उम्मीदवार बनाया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में BJP के पास पर्याप्त विधायक हैं, जिससे ये सीटें जीतने की संभावना प्रबल है।
क्या TMC से और नेता BJP में जा सकते हैं?
पार्टी हलकों में इसकी चर्चा है, लेकिन अभी कोई पुष्ट जानकारी नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर अभिषेक बनर्जी का वर्चस्व और बढ़ता है, तो और नेताओं के पलायन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।