मस्तुंग में ड्रोन से अपनों पर बमबारी — क्या पाकिस्तानी फ़ौज बलूचिस्तान में 'गृहयुद्ध' की लकीर पार कर चुकी है?

Raj Harsh

बलूच यकजहती कमेटी (BYC) के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान के मस्तुंग ज़िले में नागरिक आबादी पर ड्रोन हमला किया, जिसमें एक रिहायशी घर को निशाना बनाया गया। ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़ BYC ने इसे राज्य प्रायोजित आतंक बताया है। पाकिस्तानी सेना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

एक रिहायशी मकान। छत पर कपड़े सूख रहे हैं। आँगन में बच्चों की चप्पलें बिखरी हैं। और फिर ऊपर से आती है एक ड्रोन की गूँज — उसके बाद सिर्फ़ मलबा। यह किसी हॉलीवुड फ़िल्म का सीन नहीं, बलूचिस्तान के मस्तुंग ज़िले की ज़मीनी हक़ीक़त है — जहाँ बलूच यकजहती कमेटी (BYC) के मुताबिक़ पाकिस्तानी सेना ने अपने ही नागरिकों के घर पर ड्रोन से बमबारी की है।

ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार BYC ने इस हमले को 'राज्य प्रायोजित आतंक' क़रार दिया है और आरोप लगाया है कि मस्तुंग में एक आम नागरिक के रिहायशी ढाँचे को जानबूझकर निशाना बनाया गया। BYC के बयान में कहा गया कि इस हमले में नागरिक जानमाल का नुक़सान हुआ है। पाकिस्तानी सेना की ओर से इस विशेष हमले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यहाँ रुककर एक सवाल पूछना ज़रूरी है: वह कौन सी फ़ौज है जो अपने ही मुल्क के नागरिकों पर उसी हथियार का इस्तेमाल करती है जो आमतौर पर सरहद पार के दुश्मनों के लिए रखा जाता है? जवाब है — वह फ़ौज जो अब हताशा के आख़िरी पड़ाव पर खड़ी है।

बलूचिस्तान: एक 'अदृश्य युद्ध' का दशकों पुराना ज़ख़्म

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है — क्षेत्रफल में लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा — लेकिन विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के हर पैमाने पर सबसे पिछड़ा। ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल की अनेक रिपोर्ट्स में बलूचिस्तान में 'एनफ़ोर्स्ड डिसअपीयरेंस' यानी ज़बरदस्ती ग़ायब किए जाने, फ़र्ज़ी एनकाउंटर और फ़ौजी अत्याचारों का विस्तृत दस्तावेज़ीकरण है। BYC जैसे संगठन लगातार इन मामलों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाते रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य सशस्त्र गुटों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले तेज़ किए हैं। 2024 में BLA के 'ऑपरेशन ज़लज़ला' ने कई ज़िलों में एक साथ हमले कर इस्लामाबाद को हिला दिया था — इसकी रिपोर्ट रॉयटर्स और अल-जज़ीरा सहित कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने की थी। जवाब में पाकिस्तानी सेना ने सैन्य अभियानों की तीव्रता बेतहाशा बढ़ा दी, लेकिन नतीजा — विद्रोह और भड़का।

ड्रोन का इस्तेमाल: 'लकीर' पार होने का सबूत

पाकिस्तानी सेना पहले भी बलूचिस्तान में हेलीकॉप्टर गनशिप और भारी तोपख़ाने का इस्तेमाल कर चुकी है, लेकिन ड्रोन से नागरिक इलाक़ों पर सीधा हमला एक नई और ख़तरनाक सीमा-रेखा पार करता है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत रिहायशी आबादी पर ऐसा हमला गंभीर उल्लंघन माना जाता है — ख़ासकर जब निशाना एक ग़ैर-सैन्य ढाँचा हो। यही वह बिंदु है जहाँ 'काउंटर-इनसर्जेंसी ऑपरेशन' का बहाना ढहता है और 'अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ युद्ध' की हक़ीक़त सामने आती है।

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पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों और विश्लेषकों की चर्चा यह है कि इस्लामाबाद में बैठी सैन्य-नागरिक हाइब्रिड सरकार के लिए बलूचिस्तान अब सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। ट्रेड हलकों में फुसफुसाहट है कि CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) की अरबों डॉलर की परियोजनाएँ बलूच प्रतिरोध के कारण लगातार बाधित हो रही हैं, और बीजिंग का दबाव बढ़ रहा है कि 'कुछ भी करो, रास्ता खोलो।' विश्लेषकों का अनुमान है कि ड्रोन हमलों का बढ़ता इस्तेमाल इसी दबाव की उपज है — जहाँ सेना को 'नतीजे' दिखाने हैं, चाहे क़ीमत नागरिक जानें हों।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और विश्लेषकों के अनुमानों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

BYC का ट्रैक रिकॉर्ड और उसके दावों की विश्वसनीयता

बलूच यकजहती कमेटी एक नागरिक अधिकार संगठन है जो बलूच लोगों के ग़ायब किए जाने और राज्य हिंसा के ख़िलाफ़ अभियान चलाती रही है। BYC ने अतीत में जो दावे किए — चाहे वे ज़बरदस्ती ग़ायब किए गए लोगों की सूचियाँ हों या सामूहिक क़ब्रों की रिपोर्ट — उनमें से कई की पुष्टि बाद में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी की। ह्यूमन राइट्स वॉच ने 2011 से लेकर हाल तक अपनी रिपोर्ट्स में बलूचिस्तान में 'एनफ़ोर्स्ड डिसअपीयरेंस' की पुष्टि की है। हालाँकि, BYC एक पक्षकार संगठन है — उनके हर दावे को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना ज़रूरी है, ख़ासकर जब पाकिस्तानी सेना की प्रतिक्रिया उपलब्ध न हो।

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि मस्तुंग ड्रोन हमला कोई अकेली घटना नहीं — यह उस व्यवस्थित सैन्य हताशा का लक्षण है जो तब पैदा होती है जब कोई फ़ौज दशकों में एक विद्रोह को न दबा पाए, जनता का दिल जीतने में पूरी तरह नाकाम रहे, और अब ऊपर से चीन का आर्थिक दबाव अलग सिर पर हो। ड्रोन वह हथियार है जो दूर बैठकर बटन दबाने से चलता है — जिसमें ज़मीनी सैनिक की जान का ख़तरा नहीं लेकिन नागरिक हताहत होने की लगभग गारंटी है। यह चुनाव ही बताता है कि इस्लामाबाद अब 'दिल जीतने' का नाटक छोड़ चुका है।

भारत के लिए इसके क्या मायने?

भारत के लिए बलूचिस्तान का सवाल सिर्फ़ भू-राजनीतिक शतरंज नहीं — यह उसी पड़ोसी देश की स्थिरता का मामला है जिसके साथ हज़ारों किलोमीटर की सीमा लगती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बलूचिस्तान का ज़िक्र कर इस मुद्दे को भारतीय विदेश नीति के विमर्श में रखा था। अब जब पाकिस्तानी सेना ड्रोन जैसे अनुपातहीन बल का इस्तेमाल कर रही है, तो यह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड को उजागर करने का एक और ठोस आधार बनता है।

आगे क्या?

आने वाले दिनों में देखने लायक़ बातें: पहला, पाकिस्तानी सेना इस विशेष ड्रोन हमले पर कोई आधिकारिक बयान देती है या चुप्पी साधती है — इतिहास बताता है कि चुप्पी ही उनका डिफ़ॉल्ट है। दूसरा, BYC और बलूच डायस्पोरा इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों तक ले जाने की कोशिश करेंगे — संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में यह मुद्दा कितनी जगह पाता है, यह देखना ज़रूरी होगा। तीसरा, और सबसे अहम — क्या यह हमला बलूच सशस्त्र गुटों की भर्ती में और तेज़ी लाएगा? हर ड्रोन हमला जो एक नागरिक का घर तबाह करता है, दस नए लड़ाकों को पैदा करने की ताक़त रखता है।

जो फ़ौज अपने ही नागरिकों पर ड्रोन चलाती है, उसने असल में युद्ध नहीं — अपनी नैतिक हार का एलान किया है। सवाल अब यह नहीं कि बलूचिस्तान में 'गृहयुद्ध' शुरू होगा या नहीं — सवाल यह है कि दुनिया कब इसे उसके असली नाम से पुकारेगी।

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मुख्य बातें

  • BYC के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने मस्तुंग में नागरिक रिहायशी घर पर ड्रोन हमला किया — पाक सेना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई (ज़ी न्यूज़)।
  • बलूचिस्तान में ड्रोन का इस्तेमाल एक नई सीमा-रेखा पार करता है — पहले हेलीकॉप्टर गनशिप और तोपख़ाने का प्रयोग होता था, अब ड्रोन से सीधा नागरिक क्षेत्रों पर हमला।
  • BYC के अतीत के कई दावों की पुष्टि ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी स्वतंत्र रिपोर्ट्स में की है।
  • विश्लेषकों का अनुमान है कि CPEC परियोजनाओं पर चीन का दबाव बलूचिस्तान में बढ़ती सैन्य कार्रवाई का एक प्रमुख कारक है।
  • हर ड्रोन हमला जो नागरिक घर तबाह करता है, बलूच सशस्त्र समूहों की भर्ती को और तेज़ करने की ताक़त रखता है — यही इस्लामाबाद का सबसे बड़ा आत्मघाती विरोधाभास है।

आँकड़ों में

  • बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 44% हिस्सा है लेकिन विकास सूचकांकों में सबसे पिछड़ा प्रांत।
  • ह्यूमन राइट्स वॉच ने 2011 से लेकर हाल तक बलूचिस्तान में एनफ़ोर्स्ड डिसअपीयरेंस के सैकड़ों मामलों का दस्तावेज़ीकरण किया है।
  • 2024 में BLA के 'ऑपरेशन ज़लज़ला' ने बलूचिस्तान के कई ज़िलों में एक साथ हमले किए — रॉयटर्स और अल-जज़ीरा की रिपोर्ट।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: बलूच यकजहती कमेटी (BYC) ने पाकिस्तानी सेना पर आरोप लगाया है (ज़ी न्यूज़ के अनुसार)।
  • क्या: मस्तुंग ज़िले में एक नागरिक रिहायशी घर पर ड्रोन हमला किया गया, जिसे BYC ने राज्य प्रायोजित हिंसा बताया।
  • कब: 2026 में ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार (ज़ी न्यूज़)।
  • कहाँ: बलूचिस्तान प्रांत का मस्तुंग ज़िला, पाकिस्तान।
  • क्यों: BYC के अनुसार पाकिस्तानी सेना बलूच स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए नागरिकों को निशाना बना रही है।
  • कैसे: ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़ ड्रोन के ज़रिये एक रिहायशी ढाँचे पर हमला किया गया, जो सैन्य अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मस्तुंग ड्रोन हमले में क्या हुआ?

बलूच यकजहती कमेटी (BYC) के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान के मस्तुंग ज़िले में एक नागरिक रिहायशी घर पर ड्रोन से हमला किया। BYC ने इसे राज्य प्रायोजित आतंक बताया है। पाकिस्तानी सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है (ज़ी न्यूज़)।

BYC (बलूच यकजहती कमेटी) क्या है?

BYC एक बलूच नागरिक अधिकार संगठन है जो बलूचिस्तान में ज़बरदस्ती ग़ायब किए जाने, फ़र्ज़ी मुठभेड़ों और राज्य हिंसा के ख़िलाफ़ अभियान चलाता है। उनके कई दावों की पुष्टि ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने की है।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना ड्रोन का इस्तेमाल क्यों कर रही है?

विश्लेषकों के अनुसार बलूच सशस्त्र गुटों के बढ़ते हमलों, CPEC परियोजनाओं पर चीन के दबाव और दशकों पुराने विद्रोह को दबाने में नाकामी से उपजी सैन्य हताशा ने ड्रोन जैसे अनुपातहीन बल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है।

भारत के लिए बलूचिस्तान का मुद्दा क्यों मायने रखता है?

बलूचिस्तान पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता से सीधे जुड़ा है और भारत की सीमा सुरक्षा तथा विदेश नीति दोनों को प्रभावित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में बलूचिस्तान का ज़िक्र किया था, जिसने इसे भारतीय विदेश नीति के विमर्श में स्थापित किया।

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