छत पर सोलर, निशाने पर ड्रैगन — ALMM-II से चीन को ₹45,000 करोड़ का झटका, पर आम आदमी को क्या मिलेगा?

Singh Anchala

MNRE ने ALMM-II नियम लागू कर सरकारी रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स — जिनमें पीएम सूर्य घर योजना शामिल है — में सिर्फ़ भारत निर्मित सोलर मॉड्यूल और सेल अनिवार्य किए हैं। इससे चीनी सस्ते डंपिंग पर लगाम लगेगी और भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरिंग को अनुमानित ₹45,000 करोड़ का बूस्ट मिलेगा।

एक आँकड़ा याद रखिए — भारत के सोलर मार्केट में क़रीब 80% मॉड्यूल अभी तक चीन से आते रहे हैं। यानी छत पर पैनल भले ही तिरंगे की छाँव में चमकता हो, उसकी नसों में बीजिंग का सिलिकॉन दौड़ता था। अब MNRE के ताज़ा ALMM-II स्पष्टीकरण ने इस समीकरण पर सीधा निशाना साधा है, और असली खेल यहीं से शुरू होता है।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने जून 2026 में साफ़ किया कि पीएम सूर्य घर योजना समेत सभी सरकारी रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स में अब ALMM-II लागू होगा। Mercom India की रिपोर्ट के अनुसार, ALMM के इस दूसरे चरण में सिर्फ़ मॉड्यूल ही नहीं, बल्कि सोलर सेल भी MNRE की अनुमोदित सूची में होने ज़रूरी हैं। पहले चरण में सिर्फ़ मॉड्यूल कवर थे — अब सेल-लेवल तक बात पहुँच गई है। इसका सीधा मतलब: चीनी सेल इम्पोर्ट करके भारत में असेंबल करने का शॉर्टकट भी बंद।

समझिए इसे ऐसे — पहले कई भारतीय कंपनियाँ चीन से सस्ते सोलर सेल मँगाकर, यहाँ जोड़कर 'मेड इन इंडिया' का लेबल लगा देती थीं। ALMM-II ने यह रास्ता सील कर दिया। अब सेल भी भारत में बना होना चाहिए, तभी वह सरकारी सब्सिडी वाली योजनाओं में लग सकेगा।

पीएम सूर्य घर और ₹45,000 करोड़ का दांव

पीएम सूर्य घर योजना का लक्ष्य है एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना, जिसमें सरकार भारी सब्सिडी देती है। ब्लूमबर्ग NEF और इंडस्ट्री अनुमानों के अनुसार, भारत का रूफटॉप सोलर बाज़ार अगले पाँच वर्षों में ₹45,000 करोड़ से अधिक का हो सकता है। अब तक इस बाज़ार का बड़ा हिस्सा चीनी कंपनियों — Longi, Trina Solar, JA Solar जैसे नामों — की जेब में जाता था। ALMM-II लागू होने के बाद यह पैसा भारतीय कंपनियों — Adani Solar, Tata Power Solar, Waaree Energies, Vikram Solar — के पास आएगा।

यहाँ एक बारीकी है जो ज़्यादातर लोग नहीं समझ रहे। ALMM-II सिर्फ़ सरकारी/सब्सिडी प्रोजेक्ट्स पर लागू है — निजी रूफटॉप इंस्टॉलेशन पर अभी सीधा बंधन नहीं। लेकिन सरकारी प्रोजेक्ट्स का वॉल्यूम इतना बड़ा है कि भारतीय निर्माताओं को स्केल मिलेगा, लागत घटेगी, और धीरे-धीरे प्राइवेट मार्केट में भी चीनी पैनलों से मुक़ाबला संभव होगा।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि ALMM-II का टाइमिंग महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं। 2024 के आम चुनावों के बाद से मोदी सरकार ने 'चाइना प्लस वन' रणनीति को नई धार दी है — चाहे इलेक्ट्रॉनिक्स हो, फ़ार्मा हो या अब सोलर। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और यूरोप भी चीनी सोलर डंपिंग पर भारी टैरिफ़ लगा रहे हैं — ऐसे में भारत अगर अपना दरवाज़ा खुला रखता तो चीन का सारा 'सरप्लस माल' यहीं आ गिरता। ALMM-II असल में इस ग्लोबल ट्रेंड के साथ भारत को क़दम मिलाने का काम कर रहा है।

(यह इंडस्ट्री और सियासी हलकों की चर्चा पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

एक और पहलू जो कम चर्चा में है — 2020 में गलवान संघर्ष के बाद से भारत चीन पर आपूर्ति-निर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के चश्मे से देख रहा है। सोलर पैनल कोई मामूली उत्पाद नहीं — यह ऊर्जा अवसंरचना है। अगर किसी देश की बिजली का एक बड़ा हिस्सा ऐसे उपकरणों से आए जो एक प्रतिद्वंद्वी देश बनाता हो, तो संकट के वक़्त यह कमज़ोरी बन जाती है।

आम आदमी पर असर — सस्ता होगा या महँगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है। फ़िलहाल चीनी पैनल सस्ते हैं क्योंकि चीन सरकार अपने निर्माताओं को भारी सब्सिडी देती है — यह क्लासिक डंपिंग है। भारतीय पैनल अभी 10-15% महँगे पड़ सकते हैं। लेकिन यहाँ गणित उलट सकता है: पीएम सूर्य घर की सब्सिडी (3 kW तक के सिस्टम पर ₹78,000 तक) इस अंतर को काफ़ी हद तक भर देती है। और जैसे-जैसे भारतीय कंपनियों को स्केल मिलेगा — जो ALMM-II का असली मक़सद है — क़ीमतें गिरेंगी।

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि ALMM-II केवल एक तकनीकी नियम नहीं, बल्कि मोदी सरकार की व्यापक भू-राजनीतिक रणनीति का सोलर चैप्टर है। जिस तरह PLI स्कीम ने मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में चीन-निर्भरता तोड़ी, उसी मॉडल को अब ऊर्जा क्षेत्र में दोहराया जा रहा है — बस इस बार दांव और ऊँचे हैं क्योंकि बात बिजली की है, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट की नहीं।

आगे क्या देखना होगा?

अगले कुछ महीनों में तीन चीज़ें तय करेंगी कि ALMM-II सफल होता है या सिर्फ़ काग़ज़ी शेर बनकर रह जाता है। पहला — क्या भारतीय कंपनियाँ सेल-लेवल पर पर्याप्त उत्पादन क्षमता जल्दी खड़ी कर पाती हैं? Waaree Energies और Adani Solar ने विस्तार की घोषणाएँ की हैं, लेकिन चीन की मौजूदा क्षमता के मुक़ाबले भारत अभी बहुत पीछे है। दूसरा — प्राइवेट रूफटॉप मार्केट पर भी ALMM-II लागू होगा या नहीं, इस पर सरकार अभी चुप है। तीसरा — चीन का जवाब क्या होगा? बीजिंग ने पहले भी दुर्लभ खनिजों (rare earths) पर प्रतिबंध लगाकर जवाबी कार्रवाई की है।

आख़िर में एक बात जो हर छत के मालिक को समझनी चाहिए — ALMM-II का मतलब यह नहीं कि आपकी छत पर सोलर लगना मुश्किल हो जाएगा। मतलब यह है कि अब जो पैनल लगेगा, उसकी कमाई गुआंगडोंग की फ़ैक्ट्री में नहीं, गुजरात या तमिलनाडु की फ़ैक्ट्री में जाएगी। और यही तो असली सवाल है — जब छत आपकी है, धूप भारत की है, तो मुनाफ़ा ड्रैगन का क्यों?

आरोपों और दावों को यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से प्रस्तुत किया गया है और जब तक न्यायालय का निर्णय न हो, ये अप्रमाणित हैं; न्यायाधीन मामले बिना पूर्वाग्रह के रिपोर्ट किए गए हैं।

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मुख्य बातें

  • ALMM-II अब सोलर सेल और मॉड्यूल दोनों पर लागू — चीनी सेल इम्पोर्ट कर 'मेड इन इंडिया' लेबल लगाने का रास्ता बंद
  • पीएम सूर्य घर योजना समेत सभी सरकारी रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स में सिर्फ़ ALMM-सूचीबद्ध भारतीय उपकरण चलेंगे
  • ₹45,000 करोड़ से अधिक का रूफटॉप सोलर बाज़ार अब भारतीय कंपनियों के लिए खुला — Adani Solar, Waaree, Tata Power Solar को सीधा फ़ायदा
  • भारतीय पैनल अभी 10-15% महँगे, लेकिन सरकारी सब्सिडी (₹78,000 तक) और बढ़ते स्केल से यह अंतर घटेगा
  • यह कदम मोदी सरकार की व्यापक 'चाइना प्लस वन' रणनीति का ऊर्जा अध्याय है — गलवान के बाद से आपूर्ति-सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

आँकड़ों में

  • भारत के सोलर मार्केट में क़रीब 80% मॉड्यूल अब तक चीन से आयातित — ALMM-II इसे बदलने का सबसे बड़ा क़दम
  • रूफटॉप सोलर बाज़ार अगले 5 वर्षों में ₹45,000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान (ब्लूमबर्ग NEF और इंडस्ट्री अनुमान)
  • पीएम सूर्य घर योजना: 3 kW सिस्टम पर ₹78,000 तक सब्सिडी — ALMM-II के बाद यह सब्सिडी सिर्फ़ भारतीय पैनलों पर मिलेगी

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार
  • क्या: ALMM-II (Approved List of Models and Manufacturers - Phase II) नियम लागू किए गए, जिसके तहत सरकारी रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स में केवल ALMM-सूचीबद्ध भारतीय मॉड्यूल और सेल का उपयोग अनिवार्य
  • कब: जून 2026 में MNRE ने स्पष्टीकरण जारी किया; नियम चरणबद्ध रूप से लागू
  • कहाँ: पूरे भारत में — विशेषकर पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत सरकारी छत सोलर परियोजनाओं पर
  • क्यों: चीनी सस्ते सोलर मॉड्यूल की डंपिंग से भारतीय निर्माताओं की रक्षा, आत्मनिर्भर ऊर्जा विनिर्माण को बढ़ावा और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए
  • कैसे: ALMM-II के तहत सोलर सेल और मॉड्यूल दोनों को MNRE की अनुमोदित सूची में होना ज़रूरी; बिना ALMM-II प्रमाणन के कोई भी उपकरण सरकारी सब्सिडी वाले प्रोजेक्ट में नहीं लगेगा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ALMM-II क्या है और ALMM-I से कैसे अलग है?

ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) सरकार की अनुमोदित सोलर उपकरण सूची है। ALMM-I में सिर्फ़ सोलर मॉड्यूल को सूचीबद्ध होना ज़रूरी था। ALMM-II में अब सोलर सेल भी इस सूची में होने चाहिए — यानी सेल-लेवल पर भी भारतीय निर्माण अनिवार्य है।

क्या ALMM-II से छत पर सोलर लगवाना महँगा हो जाएगा?

फ़िलहाल भारतीय पैनल चीनी पैनलों से 10-15% महँगे हैं। लेकिन पीएम सूर्य घर योजना की सब्सिडी (3 kW तक ₹78,000) इस अंतर को काफ़ी हद तक भरती है। भारतीय कंपनियों को स्केल मिलने पर क़ीमतें और गिरने की उम्मीद है।

क्या प्राइवेट रूफटॉप सोलर पर भी ALMM-II लागू होगा?

अभी ALMM-II सिर्फ़ सरकारी सब्सिडी वाली योजनाओं और सरकारी प्रोजेक्ट्स पर लागू है। निजी रूफटॉप इंस्टॉलेशन पर सीधा बंधन नहीं, लेकिन सरकार भविष्य में इसका विस्तार कर सकती है।

ALMM-II से कौन सी भारतीय कंपनियों को सबसे ज़्यादा फ़ायदा होगा?

Adani Solar, Tata Power Solar, Waaree Energies और Vikram Solar जैसी प्रमुख भारतीय सोलर कंपनियों को सीधा लाभ मिलेगा क्योंकि सरकारी प्रोजेक्ट्स का पूरा बाज़ार अब उनके लिए आरक्षित होगा।

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