UDAN 2.0 लॉन्च — 'हवाई चप्पल से हवाई जहाज़' का वादा आठ साल बाद भी कितने रनवे पर उतरा?
पीएम मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल उद्घाटन कर Modified UDAN 2.0 योजना लॉन्च की। UDAN 1.0 में CAG ऑडिट के अनुसार सैकड़ों रूट बंद हो चुके थे और कई एयरलाइन्स ने सब्सिडी लेकर उड़ानें रोक दीं। अब 2.0 में रूट अवार्ड तंत्र और सब्सिडी ढाँचा बदला गया है।
आठ साल पहले एक नारा गूँजा था — 'हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज़ में बैठेगा।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 2017 में UDAN योजना लॉन्च की थी, तो यह वाक्य सिर्फ़ स्कीम नहीं, एक राजनीतिक वादा बन गया था। अब 2026 में उसी नारे का दूसरा अध्याय खुला है — जोधपुर के चमचमाते नए एयरपोर्ट टर्मिनल से। लेकिन बीच के इन सालों में वह वादा कितने रनवे पर ज़मीन छू पाया, यह सवाल इस टर्मिनल की चमक से कहीं ज़्यादा तीखा है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन किया और साथ ही Modified UDAN — यानी UDAN 2.0 — योजना की शुरुआत की। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, इस नए टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता काफ़ी बढ़ाई गई है और इसे राजस्थान की कनेक्टिविटी में गेम-चेंजर बताया जा रहा है। इंडिया टुडे ने बताया कि UDAN 2.0 में रूट अवार्ड तंत्र बदला गया है, सब्सिडी ढाँचे में सुधार किए गए हैं और एयरलाइन्स की जवाबदेही बढ़ाने के प्रावधान जोड़े गए हैं।
सुनने में यह सब बड़ा उम्मीद भरा लगता है। लेकिन अगर UDAN 1.0 का रिपोर्ट कार्ड देखें, तो तस्वीर उतनी गुलाबी नहीं है जितनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई जाती है।
UDAN 1.0 का कड़वा सच — बंद रनवे, गायब एयरलाइन्स
CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की पिछली ऑडिट रिपोर्ट्स ने UDAN 1.0 की कलई खोली थी। योजना के तहत अवार्ड किए गए रूट्स में से एक बड़ा हिस्सा या तो शुरू ही नहीं हुआ, या कुछ महीनों में बंद हो गया। कई छोटी एयरलाइन्स ने सरकारी सब्सिडी लेकर रूट शुरू किए, लेकिन यात्रियों की कमी या मुनाफ़ा न होने पर चुपचाप उड़ानें बंद कर दीं। एयर ओडिशा, एयर डेक्कन, ट्रूजेट — ये नाम UDAN की सफलता की कहानी में कम, उसकी विफलता की सूची में ज़्यादा याद किए जाते हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि जिन टियर-2 और टियर-3 शहरों को यह योजना हवाई नक़्शे पर लानी थी — इलाहाबाद (प्रयागराज), शिमला, पठानकोट, हुबली — उनमें से कई आज भी या तो सप्ताह में एक-दो उड़ान देखते हैं, या फिर रनवे सुनसान पड़ा है। ₹2,500 में हवाई सफ़र का वादा ज़्यादातर जगह कागज़ पर ही रहा।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में UDAN 2.0 को लेकर एक अलग ही फुसफुसाहट है। ट्रेड हलकों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा यह है कि यह लॉन्च 2024 के बाद मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में 'विकास की कहानी' को ताज़ा करने की ज़रूरत से निकला है — ख़ासकर हिंदी बेल्ट में, जहाँ अगले राज्य चुनावों की आहट है। राजस्थान में जोधपुर से लॉन्च का चुनाव भी अनायास नहीं माना जा रहा — यह बीजेपी के पश्चिमी राजस्थान कैडर को ऊर्जा देने का सटीक कैलकुलेशन है।
जनता की नब्ज़ कुछ और कहती है। सोशल मीडिया पर UDAN को लेकर लोगों का मूड मिला-जुला है — एक तरफ़ 'अबकी बार हवाई यात्रा' का जोश है, दूसरी तरफ़ 'पहले वाली UDAN का क्या हुआ?' का तीखा सवाल। पटना, रांची और देहरादून से बार-बार एक ही शिकायत उठती है — रूट मिला, उड़ान आई, तीन महीने में ग़ायब हो गई। यह भरोसे का संकट है जिसे कोई नया टर्मिनल नहीं भर सकता।
(यह राजनीतिक हलकों की चर्चा और जनभावना पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
UDAN 2.0 में क्या बदला — और क्या नहीं बदलेगा
इंडिया टुडे और टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, UDAN 2.0 में कुछ ढाँचागत बदलाव किए गए हैं। सब्सिडी का मॉडल बदला गया है ताकि एयरलाइन्स शुरुआती महीनों के बाद भी उड़ानें जारी रखें। रूट अवार्ड में मार्केट व्यवहार्यता (viability) को पहले से ज़्यादा वज़न दिया गया है। एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर — जैसे जोधपुर का नया टर्मिनल — को उड़ानों के साथ-साथ तैयार करने पर ज़ोर है।
लेकिन जो बुनियादी समस्या है, वह ढाँचागत नहीं, आर्थिक है। छोटे शहरों में यात्री माँग (passenger demand) कम है — यह कोई नई बात नहीं। जब तक रूट पर पर्याप्त यात्री नहीं होंगे, कोई भी एयरलाइन सब्सिडी ख़त्म होते ही रूट छोड़ देगी। सवाल यह है कि क्या UDAN 2.0 में ऐसा कोई तंत्र है जो माँग पैदा करे, या यह सिर्फ़ आपूर्ति पक्ष (supply side) की मरम्मत है।
हिंदी बेल्ट का हवाई हिसाब
डेक्कन क्रॉनिकल और द हिंदू की रिपोर्ट्स बताती हैं कि UDAN 2.0 के तहत कई नए रूट्स की योजना है जो हिंदी बेल्ट के टियर-2/3 शहरों को जोड़ेंगे। ग्वालियर, प्रयागराज, पटना, रांची, देहरादून — ये सब नाम फिर से सूची में हैं। लेकिन इन्हीं शहरों के नाम UDAN 1.0 में भी थे। ग्वालियर एयरपोर्ट से दिल्ली की उड़ान शुरू हुई और बंद हुई। प्रयागराज से लखनऊ का रूट कागज़ पर रहा। यह दोहराव नहीं, यह पैटर्न है — और पैटर्न टूटने का कोई ठोस सबूत इस बार भी नहीं दिख रहा।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि UDAN 2.0 का असली इम्तिहान अगले 18-24 महीनों में होगा — जब सब्सिडी की शुरुआती गर्मी उतरेगी और एयरलाइन्स को ख़ुद अपना ईंधन ख़र्च उठाना होगा। अगर इस बार भी रूट बंद हुए, तो 'हवाई चप्पल से हवाई जहाज़' सिर्फ़ एक चुनावी पंचलाइन बनकर रह जाएगा — और यह हार सिर्फ़ एक योजना की नहीं, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता की होगी।
अब देखने वाली बात यह है कि विपक्ष — ख़ासकर कांग्रेस और RJD — UDAN 1.0 के आँकड़ों को संसद में कितनी तेज़ी से उठाते हैं। बिहार और यूपी में जहाँ अगले चुनावों की तैयारी शुरू हो चुकी है, वहाँ 'बंद रनवे' का मुद्दा रैली में सोने जैसा है। बीजेपी के लिए चुनौती सिर्फ़ रूट शुरू करना नहीं, उन्हें ज़िंदा रखना है — क्योंकि इस बार अगर रनवे फिर सुनसान हुआ, तो वोटर के पास पूछने को बस एक सवाल होगा: 'वो वाला जहाज़ कहाँ गया?'
आरोपों और दावों पर सरकार या संबंधित पक्षों की अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
यहाँ दर्ज आरोप नामित स्रोतों के हवाले से हैं और जब तक अदालत का फ़ैसला न आए, अप्रमाणित हैं; न्यायाधीन मामले बिना पूर्वाग्रह के रिपोर्ट किए गए हैं।
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मुख्य बातें
- UDAN 1.0 में अवार्ड किए गए बड़ी संख्या में रूट बंद हो चुके हैं, CAG ने योजना की ख़ामियों पर सवाल उठाए थे।
- UDAN 2.0 में सब्सिडी ढाँचा और रूट अवार्ड तंत्र बदला गया — एयरलाइन्स की जवाबदेही बढ़ाई गई, रिपोर्ट — इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ़ इंडिया।
- जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल उद्घाटन — सालाना यात्री क्षमता बढ़ाई गई, रिपोर्ट — द हिंदू।
- हिंदी बेल्ट के ग्वालियर, प्रयागराज, पटना, रांची जैसे शहर फिर से UDAN 2.0 की सूची में — लेकिन ये नाम 1.0 में भी थे और वहाँ रूट बंद हुए।
- असली इम्तिहान 18-24 महीनों में होगा जब सब्सिडी की शुरुआती गर्मी उतरेगी।
आँकड़ों में
- UDAN 1.0 (2017 से शुरू) में अवार्ड किए गए रूट्स का एक बड़ा हिस्सा बंद हुआ — CAG ऑडिट रिपोर्ट्स।
- ₹2,500 में हवाई सफ़र का वादा ज़्यादातर टियर-2/3 शहरों में कागज़ पर ही रहा — सार्वजनिक रिपोर्ट्स।
- UDAN 2.0 में रूट अवार्ड तंत्र और सब्सिडी ढाँचे में ढाँचागत बदलाव किए गए — इंडिया टुडे।
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UDAN 2.0 लॉन्च किया, रिपोर्ट — द हिंदू, टाइम्स ऑफ़ इंडिया।
- क्या: जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन और Modified UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना की शुरुआत — इंडिया टुडे।
- कब: जून 2026 — टाइम्स ऑफ़ इंडिया।
- कहाँ: जोधपुर, राजस्थान — डेक्कन क्रॉनिकल।
- क्यों: रीजनल एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने और टियर-2/3 शहरों को सस्ती हवाई सेवा देने के लिए — द हिंदू।
- कैसे: UDAN 1.0 के रूट अवार्ड तंत्र में बदलाव, सब्सिडी ढाँचे में सुधार और एयरलाइन्स की जवाबदेही बढ़ाकर — इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ़ इंडिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
UDAN 2.0 योजना क्या है और यह UDAN 1.0 से कैसे अलग है?
UDAN 2.0 (Modified UDAN) भारत सरकार की रीजनल एयर कनेक्टिविटी योजना का संशोधित संस्करण है। इंडिया टुडे और टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, इसमें सब्सिडी ढाँचा बदला गया है, रूट अवार्ड में मार्केट व्यवहार्यता को ज़्यादा वज़न दिया गया है और एयरलाइन्स की जवाबदेही बढ़ाई गई है।
UDAN 1.0 में कितने रूट बंद हुए?
CAG ऑडिट रिपोर्ट्स के अनुसार, UDAN 1.0 के तहत अवार्ड किए गए रूट्स का एक बड़ा हिस्सा या तो शुरू नहीं हुआ या कुछ महीनों में बंद हो गया। कई छोटी एयरलाइन्स ने सब्सिडी लेकर उड़ानें बंद कर दीं।
UDAN 2.0 से हिंदी बेल्ट के कौन से शहरों को फ़ायदा होगा?
द हिंदू और डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्वालियर, प्रयागराज, पटना, रांची, देहरादून जैसे टियर-2/3 शहर UDAN 2.0 की योजना में शामिल हैं। हालाँकि ये शहर UDAN 1.0 में भी थे और वहाँ रूट बंद हुए।
जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल कब खुला?
जून 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया — रिपोर्ट द हिंदू, टाइम्स ऑफ़ इंडिया।