सिंधु संधि सस्पेंड, पूर्वी नदियों का पानी 'आज़ाद' — पर किसान की प्यास बुझेगी या सिर्फ़ पाक को सबक?

Raj Harsh

सिंधु जल संधि सस्पेंड होने के बाद पूर्वी नदियों — रावी, ब्यास, सतलुज — का पानी सैद्धांतिक रूप से भारत के पूर्ण नियंत्रण में आ गया है। लेकिन इस पानी को पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के खेतों तक पहुँचाने के लिए डैम और कैनाल इन्फ्रास्ट्रक्चर की जो ज़रूरत है, वह दशकों से अधूरा पड़ा है।

तीन नदियाँ — रावी, ब्यास, सतलुज। 1960 से कागज़ पर भारत की। व्यवहार में? हर साल करोड़ों एकड़-फ़ीट पानी बिना रोके पाकिस्तान बहता रहा। अब जब सिंधु जल संधि सस्पेंड हुई है, तो दिल्ली में जश्न का माहौल है और इस्लामाबाद में हड़कंप। लेकिन असली सवाल वह है जो न संसद में उठा, न प्राइमटाइम पर — यह 'आज़ाद' हुआ पानी आख़िर जाएगा कहाँ? क्या श्रीगंगानगर के किसान के सूखे खेत तक, या फिर नेताओं के भाषणों तक?

ABP News की रिपोर्ट के अनुसार, संधि सस्पेंड होने के बाद पूर्वी नदियों का पानी अब भारत के मौजूदा डैम इन्फ्रास्ट्रक्चर — भाखड़ा-नांगल, पोंग, रणजीत सागर और थीन डैम — के ज़रिए रोका और डायवर्ट किया जा सकता है। रावी का पानी जो दशकों से माधोपुर हेडवर्क्स से पाकिस्तान जाता था, अब सैद्धांतिक रूप से रोका जा सकता है। सतलुज पर भाखड़ा की विशाल झील पहले से मौजूद है, और ब्यास पर पोंग डैम।

लेकिन यहीं कहानी का असली मोड़ आता है। ये डैम पानी रोक सकते हैं — पर उसे खेतों तक ले जाने वाली कैनालें? केंद्रीय जल आयोग के आँकड़ों के हवाले से विशेषज्ञ बताते हैं कि शाहनहर कैनाल प्रणाली और राजस्थान नहर (इंदिरा गांधी नहर) की क्षमता मौजूदा ज़रूरत से कम है। इंदिरा गांधी नहर, जो राजस्थान के रेगिस्तान को हरा करने का सपना लेकर बनी थी, उसके आख़िरी छोर — जैसलमेर और बाड़मेर — तक पानी नियमित रूप से नहीं पहुँचता। यानी पानी 'आज़ाद' तो हो गया, लेकिन उसे ले जाने वाली सड़क ही टूटी हुई है।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में जो बात चल रही है, वह प्राइमटाइम से अलग है। दिल्ली के नीति-निर्माता हलकों में फुसफुसाहट यह है कि संधि सस्पेंड करने का फ़ैसला मूलतः कूटनीतिक — पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने का हथियार है, किसान कल्याण योजना नहीं। पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांत की 80% से अधिक खेती सिंधु बेसिन के पानी पर निर्भर है — यह आँकड़ा विश्व बैंक की रिपोर्ट्स में दर्ज है। दबाव वहाँ बनेगा, इसमें शक नहीं। लेकिन क्या यह दबाव इतना होगा कि इस्लामाबाद आतंकवाद पर घुटने टेके? ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में ले जाने की तैयारी कर रहा है — और अंतरराष्ट्रीय कानून में जल-संधि सस्पेंशन की वैधता एक ग्रे ज़ोन है।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

अब ज़रा नंबरों की बात करें। पूर्वी नदियों से हर साल लगभग 33 मिलियन एकड़-फ़ीट (MAF) पानी बहता है — यह केंद्रीय जल आयोग का अनुमान है। इसमें से भारत पहले भी बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करता था, लेकिन करीब 2-3 MAF पानी बिना इस्तेमाल पाकिस्तान पहुँच जाता था। अब अगर यह पानी रोका जाए, तो सवाल है — इसे स्टोर कहाँ करेंगे? भाखड़ा की लाइव स्टोरेज क़रीब 6.6 MAF है, पोंग की 6.9 MAF। यानी स्टोरेज तो है, पर डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क — कैनाल, लिफ्ट इरिगेशन, माइक्रो-इरिगेशन — वह कड़ी है जहाँ दशकों की उपेक्षा का बिल अब सामने आएगा।

इस पूरे मामले को इंडिया हेराल्ड का सटीक पॉलिटिकल रीड यह है कि मोदी सरकार का 'पानी से प्रेशर' गेम दो तल पर चल रहा है। पहला तल — अंतरराष्ट्रीय: पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से कोने में धकेलना। दूसरा तल — घरेलू: 2029 के आम चुनाव से पहले पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में 'देखो, हमने पानी दिलाया' का नैरेटिव खड़ा करना। लेकिन अगर पानी खेतों तक नहीं पहुँचा — और इन्फ्रास्ट्रक्चर की मौजूदा हालत में अगले 2-3 साल में पहुँचना मुश्किल है — तो यह नैरेटिव बूमरैंग भी हो सकता है।

पंजाब के किसान नेताओं की भाषा सुनें तो तस्वीर और साफ़ होती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पंजाब की किसान यूनियनों ने पहले ही सवाल उठाया है कि SYL (सतलुज-यमुना लिंक) नहर का क्या होगा — वह प्रोजेक्ट जो पंजाब-हरियाणा विवाद में दशकों से अटका है। अगर पूर्वी नदियों का अतिरिक्त पानी आया, तो क्या हरियाणा उसमें से अपना हिस्सा माँगेगा? और अगर माँगा, तो पंजाब में अकाली दल और AAP दोनों इसे 'पंजाब के पानी की लूट' बताकर राजनीतिक आग लगाएँगे — यह लगभग तय है।

राजस्थान का हाल और भी विडंबनापूर्ण है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना की दूसरी स्टेज कई हिस्सों में अभी तक अधूरी है। जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नहर के आख़िरी हिस्सों में सिल्टिंग और रखरखाव की कमी बड़ी समस्या है। यानी अतिरिक्त पानी आए भी, तो वह जोधपुर या बाड़मेर के किसान तक पहुँचने में सालों लगेंगे — जब तक कि बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश न हो।

पाकिस्तान की रणनीति भी समझनी ज़रूरी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस्लामाबाद पहले ही इस मसले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) में ले जाने की बात कर रहा है। 1960 की संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी, और विश्व बैंक ने पहले भी इस मामले में 'तटस्थ विशेषज्ञ' नियुक्ति की प्रक्रिया चलाई है। अगर ICJ ने भारत की सस्पेंशन को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना — जो एक वास्तविक संभावना है — तो कूटनीतिक तौर पर भारत की स्थिति कमज़ोर हो सकती है।

तो असली सवाल वही लौटकर आता है जो शीर्षक में था। पानी 'आज़ाद' हो गया — लेकिन क्या पाइपलाइन तैयार है? अगर सरकार अगले दो साल में कैनाल नेटवर्क, SYL विवाद और लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट्स पर गंभीर निवेश नहीं करती, तो यह 'पानी की आज़ादी' उसी तरह कागज़ी रहेगी जैसे 1960 से रही है। किसान को पानी नहीं, वादा मिलेगा। और वादों से न गेहूँ उगता है, न सरसों।

[EMBED-SUGGESTION:tweet]

More from India Herald

PoliticsChina Controls 70% of Critical Minerals Processing — Is Beijing Engineering a Chokehold on India's EV and Defence Future?Beijing's pointed remarks on the Indo-Pacific and critical minerals are not diplomatic pleasantries — they are a calibrated signal. With Chi…
PoliticsManish Tewari Backs Modi's Indus Treaty Freeze — Why Has the Punjab MP Just Walked Congress Into a Nationalist Trap It Cannot Exit?A sitting Congress MP publicly echoes the PM's hardline on Pakistan and water — and hands his own party a lose-lose choice between Punjab's …
PoliticsIndia Freezes Indus Treaty Till Terror Ends — But Does Delhi Actually Have the Dams to Back Its Boldest Threat?India has frozen the Indus Waters Treaty until Pakistan dismantles its terror infrastructure — but the real story is not the diplomatic ulti…
PoliticsIndia's Indus Freeze, Pakistan's Public SOS, 80% of Punjab's Farmland at Stake — Has Delhi Found the Non-Kinetic Weapon That Hurts More Than Any Missile?Pakistan's increasingly desperate public appeals over the Indus Waters Treaty reveal that India's post-Pahalgam water suspension has cut dee…
Politics1960 Treaty, 6 Rivers, Two Nuclear States, One Tap — Is India's Indus Abeyance a Pressure Play or the Permanent Death of a Water-Sharing Pact?Pakistan calls it a 'water weapon.' India calls it a consequence. Six rivers, 270 million acres of Pakistani farmland, and a 65-year-old tre…

मुख्य बातें

  • पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का 2-3 MAF अतिरिक्त पानी सैद्धांतिक रूप से भारत को उपलब्ध, लेकिन कैनाल इन्फ्रास्ट्रक्चर अधूरा होने से खेतों तक पहुँचना कठिन।
  • संधि सस्पेंशन का प्राथमिक उद्देश्य कूटनीतिक दबाव है — पाकिस्तान के सिंध-पंजाब की 80%+ खेती सिंधु बेसिन पर निर्भर।
  • SYL नहर विवाद और इंदिरा गांधी नहर की अधूरी स्टेज-2 — ये दो बड़ी अड़चनें हैं जिनके बिना अतिरिक्त पानी का लाभ किसानों तक नहीं पहुँचेगा।
  • पाकिस्तान ICJ में मामला ले जाने की तैयारी में — अंतरराष्ट्रीय कानून में जल-संधि सस्पेंशन ग्रे ज़ोन है।
  • 2029 चुनाव से पहले 'पानी दिलाया' नैरेटिव — अगर डिलीवरी नहीं हुई तो बूमरैंग हो सकता है।

आँकड़ों में

  • पूर्वी नदियों से वार्षिक प्रवाह लगभग 33 MAF, जिसमें 2-3 MAF बिना उपयोग पाकिस्तान जाता था — केंद्रीय जल आयोग अनुमान
  • भाखड़ा लाइव स्टोरेज ~6.6 MAF, पोंग डैम ~6.9 MAF — स्टोरेज है, डिस्ट्रिब्यूशन नहीं
  • पाकिस्तान के सिंध-पंजाब की 80%+ खेती सिंधु बेसिन पर निर्भर — विश्व बैंक रिपोर्ट

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: भारत सरकार ने सिंधु जल संधि 1960 को सस्पेंड किया; इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के किसान और पाकिस्तान प्रभावित हैं।
  • क्या: पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) पर भारत का पूर्ण नियंत्रण सैद्धांतिक रूप से लागू, पाकिस्तान को पानी देने की बाध्यता फ़िलहाल स्थगित।
  • कब: 2026 में भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच यह फ़ैसला लिया गया, ABP News के अनुसार।
  • कहाँ: प्रभावित क्षेत्र — पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पाकिस्तान का सिंध-पंजाब इलाका।
  • क्यों: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने कूटनीतिक दबाव के तहत संधि सस्पेंड की; पाकिस्तान पर आर्थिक और कृषि दबाव बनाना मुख्य उद्देश्य माना जा रहा है।
  • कैसे: भारत ने संधि के प्रावधानों को सस्पेंड कर पूर्वी नदियों के पानी पर अपना अधिकार जताया; अब यह पानी मौजूदा डैम और कैनाल नेटवर्क के ज़रिए डायवर्ट करने की योजना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सिंधु जल संधि सस्पेंड होने से पूर्वी नदियों के पानी पर क्या असर होगा?

रावी, ब्यास और सतलुज का पानी जो बिना इस्तेमाल पाकिस्तान जाता था (लगभग 2-3 MAF), अब भारत रोक सकता है। लेकिन यह पानी खेतों तक पहुँचाने के लिए कैनाल और सिंचाई इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश ज़रूरी है।

क्या पंजाब और राजस्थान के किसानों को तुरंत फ़ायदा मिलेगा?

तुरंत नहीं। इंदिरा गांधी नहर की दूसरी स्टेज अधूरी है, SYL नहर विवाद अनसुलझा है, और मौजूदा कैनाल नेटवर्क की क्षमता सीमित है। ठोस लाभ के लिए 2-3 साल का इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ज़रूरी होगा।

पाकिस्तान इस पर क्या कदम उठा सकता है?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) में मामला ले जाने की तैयारी में है। 1960 की संधि विश्व बैंक मध्यस्थता में हुई थी और अंतरराष्ट्रीय कानून में एकतरफ़ा सस्पेंशन विवादित क्षेत्र है।

सिंधु जल संधि 1960 में पूर्वी और पश्चिमी नदियों का बँटवारा कैसे हुआ था?

1960 की संधि में पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज) भारत को और पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) पाकिस्तान को आवंटित हुई थीं, विश्व बैंक की मध्यस्थता में।

More from India Herald

Politicsमनीष तिवारी ने मोदी की सिंधु नीति पर लगाई मुहर — कांग्रेस में 'हॉक्स बनाम डव्स' की दरार फिर खुली?पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी का 'खून और पानी साथ नहीं बह सकते' बयान सिर्फ सिंधु जल संधि पर टिप्पणी नहीं — यह कांग्रेस के भीतर पाकिस्तान…
Politicsसिंधु जल संधि 'बेमतलब' — जब भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ही बोल उठे तो क्या मोदी सरकार पानी का ट्रंप कार्ड खेलने को तैयार है?भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने दशकों पुरानी सिंधु जल संधि को 'अप्रासंगिक' बताकर वह बहस सार्वजनिक कर दी जो सरकारी गलियारों में सालों…
Politicsबिलावल का 'इज़्ज़त वाली शांति' नारा, मोदी का साइलेंट वॉटर प्रेशर — सिंधु जल संधि पर असली जंग किसकी घरेलू मजबूरी से लड़ी जा रही है?बिलावल भुट्टो ज़ारदारी का 'इज़्ज़त वाली शांति' का बयान सिर्फ़ विदेश नीति नहीं, पाकिस्तान के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष का शीशा है — और मोदी सर…

Find Out More:

Related Articles: