₹5000 करोड़, 600 हैमर मिसाइलें, 2300 एंटी-टैंक गोलाबारूद — क्या LAC पर चीन के बंकरों की 'कब्रगाह' तैयार कर रही है मोदी सरकार?

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) लगभग ₹5000 करोड़ की दो सौदों को मंज़ूरी देने जा रही है — फ्रांस से 600 HAMMER एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें और स्वदेशी 2300 MP-ATGM मिसाइलें। News18 और India Today के अनुसार यह LAC पर चीन की पहाड़ी चौकियों को निशाना बनाने की भारत की सबसे तीखी तैयारी है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC), रक्षा मंत्रालय, भारतीय वायुसेना और थलसेना — News18 के अनुसार।
  • क्या: 600 HAMMER (Highly Agile Modular Munition Extended Range) मिसाइलों और 2300 मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों (MP-ATGM) की खरीद को मंज़ूरी — India Today के अनुसार।
  • कब: 2025 की आगामी DAC बैठक में औपचारिक स्वीकृति अपेक्षित — News18 के अनुसार।
  • कहाँ: यह सौदा LAC यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनाती के लिए है, ख़ासकर पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल सेक्टर — India Today के अनुसार।
  • क्यों: चीन की लगातार बढ़ती सीमावर्ती चौकियों, बंकरों और बख्तरबंद तैनाती के जवाब में भारतीय सेनाओं की स्ट्राइक और एंटी-आर्मर क्षमता बढ़ाने के लिए — News18 के अनुसार।
  • कैसे: HAMMER मिसाइलें राफेल और तेजस MK1A लड़ाकू विमानों से दागी जाएँगी जो पहाड़ी बंकरों को भेद सकती हैं, जबकि MP-ATGM को पैदल सैनिक कंधे से दाग सकेंगे — India Today के अनुसार।

एक संख्या याद रखिए — 600। छह सौ HAMMER मिसाइलें, जिनमें से हर एक को 70 किलोमीटर दूर से किसी पहाड़ी बंकर की खिड़की में घुसेड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अब एक और संख्या — 2,300। ये MP-ATGM मिसाइलें हैं जिन्हें एक अकेला जवान अपने कंधे पर लादकर 15,000 फ़ीट की ऊँचाई पर ले जा सकता है और किसी भी बख्तरबंद वाहन को मलबे में बदल सकता है। दोनों का कुल बिल — लगभग ₹5,000 करोड़। News18 की रिपोर्ट के अनुसार रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) इन दोनों सौदों को जल्द ही हरी झंडी देने जा रही है, और इसका हर रुपया LAC पर चीन के साथ जारी सैन्य गतिरोध की भाषा बदलने के लिए ख़र्च होगा।

सवाल यह नहीं है कि भारत हथियार क्यों ख़रीद रहा है — सवाल यह है कि इस वक़्त क्यों, इस मात्रा में क्यों, और इस ख़ास कॉम्बिनेशन में क्यों। इसका जवाब LAC के भूगोल और चीन की बदलती रणनीति में छिपा है।

HAMMER — पहाड़ों में बंकर-बस्टर की ज़रूरत क्यों?

HAMMER (Highly Agile Modular Munition Extended Range) फ्रांसीसी कंपनी Safran का एक ऐसा हथियार है जिसे मूल रूप से शहरी और पहाड़ी इलाकों में ठिकानों को सटीक निशाने से तबाह करने के लिए बनाया गया था। India Today के अनुसार ये मिसाइलें GPS, INS और लेज़र — तीनों गाइडेंस सिस्टम पर काम कर सकती हैं, यानी अगर दुश्मन ने GPS जैम कर दिया तो भी HAMMER अपना रास्ता ख़ुद खोज लेती है।

LAC पर इसकी ज़रूरत समझिए: चीन ने पिछले पाँच वर्षों में पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक दर्जनों कंक्रीट बंकर, भूमिगत शेल्टर और हेलीपैड बनाए हैं। पारंपरिक बम गिराने के लिए लड़ाकू विमान को ठीक ऊपर से गुज़रना पड़ता है — 16,000 फ़ीट की ऊँचाई पर, जहाँ हवा पतली है और चीनी एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय, यह आत्मघाती होगा। HAMMER का फ़ायदा यह है कि राफेल या तेजस MK1A इसे 70 किलोमीटर दूर से 'स्टैंड-ऑफ़' मोड में दाग़ सकते हैं — विमान दुश्मन की मिसाइल रेंज में आए बिना बंकर तबाह कर सकता है। News18 के अनुसार यह पहाड़ी युद्ध में भारत की 'सर्जिकल' मारक क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगा।

2,300 MP-ATGM — ज़मीनी जवान का 'टैंक-किलर'

दूसरा सौदा शायद कम चर्चित है लेकिन उतना ही अहम — 2,300 मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें (MP-ATGM)। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं और DRDO ने इन्हें विकसित किया है। एक MP-ATGM का वज़न इतना कम है कि दो जवान मिलकर इसे ऊँचाई वाले इलाक़ों में ले जा सकते हैं — और इसकी मारक रेंज 2.5 किलोमीटर तक है।

LAC पर चीन ने Type-15 हल्के टैंक तैनात किए हैं जो ऊँचाई पर काम करने के लिए ख़ास तौर पर बनाए गए हैं। भारतीय सेना के पास अब तक इन टैंकों से निपटने के लिए भारी मिलान या कोंकर्स मिसाइलें थीं, लेकिन उन्हें ज़मीनी वाहनों से दागा जाता है — जो पहाड़ी दर्रों में हमेशा मुमकिन नहीं। MP-ATGM इस खाई को भरती है: एक पैदल पैट्रोल भी अब बख्तरबंद ख़तरे का जवाब दे सकेगी।

पॉलिटिकल पल्स — टाइमिंग में छिपा है असली सिग्नल

रक्षा ख़रीद के फ़ैसले हमेशा 'ज़रूरत' और 'राजनीतिक कैलेंडर' दोनों से तय होते हैं — और यह सौदा इसका बेहतरीन उदाहरण है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि पहलगाम हमले के बाद से सरकार पर सैन्य तैयारी का दबाव बढ़ा है, और DAC की मंज़ूरियों की रफ़्तार पिछले छह महीनों में साफ़ तेज़ हुई है। यह महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं कि HAMMER जैसी महँगी फ्रांसीसी मिसाइल और स्वदेशी MP-ATGM — दोनों एक ही बैठक में रखे जा रहे हैं।

(यह इंडस्ट्री और सियासी हलकों की चर्चा है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल-डिफेंस रीड यह है कि इन दोनों सौदों को एक साथ लाना एक सोची-समझी 'सिग्नलिंग' रणनीति है। फ्रांस से HAMMER की ख़रीद दिखाती है कि भारत अपने राफेल बेड़े को 'एयर सुपीरियरिटी फ़ाइटर' से 'डीप स्ट्राइक प्लेटफॉर्म' में बदल रहा है — यह सीधे चीन को संदेश है कि उसके LAC पर बनाए बंकर सुरक्षित नहीं हैं। साथ ही MP-ATGM का स्वदेशी होना 'मेक इन इंडिया' का राजनीतिक नैरेटिव भी मज़बूत करता है — एक तीर से दो निशाने।

हवा से ज़मीन, ज़मीन से टैंक — 'लेयर्ड डिटरेंस' की रणनीति

सैन्य विश्लेषकों के बीच इस सौदे को 'लेयर्ड डिटरेंस' के चश्मे से देखा जा रहा है। India Today के अनुसार इसका मतलब यह है कि अब भारत के पास LAC पर हमले की एक नहीं, दो परतें होंगी — पहली परत हवा से, जहाँ राफेल HAMMER से बंकर और कमांड सेंटर तबाह करेगा; दूसरी परत ज़मीन से, जहाँ पैदल जवान MP-ATGM से बख्तरबंद वाहनों और तोपों की पोज़ीशन को ख़त्म करेगा। यह 'ऊपर से मारो, नीचे से रोको' का फ़ॉर्मूला है — और पहाड़ी युद्ध में यह घातक कॉम्बिनेशन है।

एक और बात जो अक्सर नज़रअंदाज़ होती है — HAMMER को तेजस MK1A पर भी लगाया जा सकता है। News18 की रिपोर्ट यह इशारा करती है कि आने वाले वर्षों में जब तेजस की संख्या बढ़ेगी, तो HAMMER का यह भंडार सिर्फ़ 36 राफेल तक सीमित नहीं रहेगा — बल्कि भारत का पूरा लड़ाकू बेड़ा एक 'बंकर-बस्टर फ़ोर्स' बन सकता है।

₹5,000 करोड़ — पैसे कहाँ जा रहे हैं?

News18 के अनुसार कुल सौदा लगभग ₹5,000 करोड़ का है। HAMMER मिसाइलों का हिस्सा बड़ा है क्योंकि ये फ्रांस से सीधी ख़रीद हैं — Safran और MBDA से। MP-ATGM का हिस्सा स्वदेशी होने के कारण अपेक्षाकृत कम ख़र्चीला है लेकिन संख्या में ज़्यादा (2,300)। India Today की रिपोर्ट बताती है कि MP-ATGM को भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) निर्मित करेगी, जो DRDO की डिज़ाइन पर आधारित है — यानी हर मिसाइल भारत में बनेगी।

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आगे क्या? — DAC से डिलीवरी तक का रास्ता

DAC की मंज़ूरी पहला क़दम है, अंतिम नहीं। इसके बाद अनुबंध वार्ता, कीमत तय करना और डिलीवरी शेड्यूल — यह प्रक्रिया 12-18 महीने ले सकती है। लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि HAMMER की पहली खेप जल्दी आ सकती है क्योंकि राफेल पहले से HAMMER-कम्पैटिबल है — भारत ने 2020-21 में फ्रांस से आपातकालीन ख़रीद के तहत पहले ही कुछ HAMMER मिसाइलें मँगवाई थीं।

ज़्यादा दिलचस्प सवाल यह होगा कि क्या यह सौदा आने वाले महीनों में राफेल-मरीन (नौसेना संस्करण) की चर्चा को भी गर्म करेगा — क्योंकि HAMMER नौसैनिक राफेल पर भी लग सकती है, और हिंद महासागर में चीनी नौसैनिक गतिविधि बढ़ रही है।

आँकड़ों में

  • ₹5,000 करोड़ — DAC के समक्ष प्रस्तावित कुल रक्षा सौदे का मूल्य (News18)
  • 600 — HAMMER एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों की संख्या, रेंज ~70 किमी (India Today)
  • 2,300 — स्वदेशी MP-ATGM मिसाइलों की संख्या, रेंज ~2.5 किमी (India Today)
  • 36 — भारत के मौजूदा राफेल लड़ाकू विमान जो HAMMER-कम्पैटिबल हैं

मुख्य बातें

  • DAC लगभग ₹5,000 करोड़ की दो रक्षा डील को मंज़ूरी देने जा रही है — 600 HAMMER मिसाइलें (फ्रांस) और 2,300 स्वदेशी MP-ATGM — News18 के अनुसार।
  • HAMMER मिसाइलें 70 किमी दूर से पहाड़ी बंकरों को तबाह कर सकती हैं, जिससे राफेल और तेजस MK1A को 'स्टैंड-ऑफ़ स्ट्राइक' क्षमता मिलेगी।
  • MP-ATGM स्वदेशी हैं, DRDO-डिज़ाइन और BDL-निर्मित — एक पैदल जवान कंधे से 2.5 किमी तक बख्तरबंद वाहन को मार गिरा सकता है।
  • यह 'लेयर्ड डिटरेंस' रणनीति है — हवा से HAMMER बंकर तोड़ेगी, ज़मीन पर MP-ATGM टैंक रोकेगी।
  • तेजस MK1A पर HAMMER इंटीग्रेशन से भविष्य में पूरा लड़ाकू बेड़ा बंकर-बस्टर फ़ोर्स बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

HAMMER मिसाइल क्या है और यह कैसे काम करती है?

HAMMER (Highly Agile Modular Munition Extended Range) फ्रांस की Safran कंपनी की एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल है जो GPS, INS और लेज़र गाइडेंस पर काम करती है। इसे 70 किमी दूर से दागा जा सकता है, जिससे विमान दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज से बाहर रहता है — India Today के अनुसार।

MP-ATGM क्या है और यह LAC पर कैसे काम आएगी?

MP-ATGM (Man-Portable Anti-Tank Guided Missile) DRDO द्वारा विकसित स्वदेशी मिसाइल है जिसे एक-दो जवान कंधे पर ले जा सकते हैं। इसकी रेंज ~2.5 किमी है और यह चीन के Type-15 हल्के टैंकों जैसे बख्तरबंद वाहनों को नष्ट कर सकती है — India Today के अनुसार।

यह ₹5,000 करोड़ का सौदा कब तक पूरा होगा?

DAC की मंज़ूरी पहला चरण है; अनुबंध वार्ता और डिलीवरी में 12-18 महीने लग सकते हैं। हालाँकि HAMMER की पहली खेप जल्दी आ सकती है क्योंकि राफेल पहले से इसके अनुकूल है — News18 के अनुसार।

क्या HAMMER सिर्फ़ राफेल से दागी जा सकती है?

नहीं। News18 की रिपोर्ट के अनुसार HAMMER को तेजस MK1A पर भी इंटीग्रेट किया जा सकता है, जिससे भविष्य में भारत का पूरा लड़ाकू बेड़ा बंकर-बस्टर क्षमता हासिल कर सकता है।

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