कराची में 29 जवान शहीद, बौखलाए पाक ने अफगानिस्तान पर बरसाए बम — क्या अपने पाले 'भस्मासुर' से हार रही पाक सेना?

कराची में सैनिकों पर भीषण आतंकी हमले के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा पर ग्राउंड ऑपरेशन चलाकर 29 आतंकियों को मारने का दावा किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद ने अफगान तालिबान पर TTP को शरण देने का आरोप लगाया है — वही तालिबान जिसे कभी पाकिस्तानी सेना ने खुद पाला-पोसा था।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान सीमा पर कार्रवाई की; TTP ने कराची हमले की ज़िम्मेदारी ली — तेलंगाना टुडे रिपोर्ट
  • क्या: कराची में सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान बॉर्डर पर ग्राउंड ऑपरेशन में 29 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया — हिंदुस्तान टाइम्स
  • कब: कराची हमले के एक दिन बाद पाकिस्तान ने जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू की — हिंदुस्तान टाइम्स रिपोर्ट
  • कहाँ: पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा क्षेत्र और कराची, पाकिस्तान — तेलंगाना टुडे
  • क्यों: इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान तालिबान TTP आतंकियों को शरण दे रहा है, जिन्होंने कराची हमला अंजाम दिया — टाइम्स ऑफ इंडिया
  • कैसे: पाकिस्तानी सेना ने सीमा पार ग्राउंड ऑपरेशन और हवाई हमलों के ज़रिए कार्रवाई की, जिसमें 29 आतंकी मारे गए बताए जा रहे हैं — हिंदुस्तान टाइम्स

एक तरफ़ दुनिया के सामने 'शांतिदूत' बनने का नाटक, दूसरी तरफ़ अपने ही पड़ोसी पर बम। पाकिस्तान की यह कहानी नई नहीं है — लेकिन इस बार बौखलाहट का पैमाना कुछ और ही बता रहा है। कराची में सुरक्षाबलों पर हुए भीषण आतंकी हमले के ठीक एक दिन बाद, इस्लामाबाद ने अफगानिस्तान सीमा पर ग्राउंड ऑपरेशन चलाकर 29 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने सीमा पार हवाई और ज़मीनी दोनों तरह की कार्रवाई की। लेकिन असली सवाल यह नहीं कि पाकिस्तान ने कितने आतंकी मारे — असली सवाल यह है कि जिस 'भस्मासुर' को इस्लामाबाद ने दशकों तक अपने हाथों पाला, वो अब ख़ुद पाकिस्तान का गला क्यों घोंट रहा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस पूरे हमले का ठीकरा अफगान तालिबान पर फोड़ा है — आरोप यह कि काबुल की तालिबान सरकार TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को शरण दे रही है और वहीं से ये आतंकी पाकिस्तान में घुसकर हमले करते हैं। इस्लामाबाद 'शांतिदूत' की भूमिका में दुनिया के सामने अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनवाने का श्रेय लेता रहा, और अब वही तालिबान उसकी सबसे बड़ी सिरदर्दी बन चुका है। तेलंगाना टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सेना के अनुसार सीमा के पास छिपे 29 आतंकवादी इस ऑपरेशन में मारे गए।

ज़रा एक क़दम पीछे चलिए। अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता तक पहुँचाने में पाकिस्तान की ISI की भूमिका किसी से छिपी नहीं। 2021 में जब अमेरिका की वापसी के बाद तालिबान ने काबुल पर कब्ज़ा किया, तो इस्लामाबाद के गलियारों में जश्न मनाया गया — 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' मिल गई, भारत का प्रभाव कम हो गया। लेकिन उस जश्न की स्याही सूखी भी नहीं थी कि TTP ने पाकिस्तान के भीतर ही तबाही का सिलसिला शुरू कर दिया। TTP, जो अफगान तालिबान का चचेरा भाई जैसा संगठन है, उसे काबुल की तालिबान सरकार ने कभी खुलकर नहीं रोका — और पाकिस्तान की सारी मिन्नतें, धमकियाँ, कूटनीतिक दबाव बेकार गए।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में जो बात दबी ज़बान से हो रही है, वो आधिकारिक बयानों से कहीं ज़्यादा कड़वी है। इस्लामाबाद के रक्षा विश्लेषकों के बीच चर्चा है कि पाक सेना का यह 'तुरंत जवाबी कार्रवाई' का शो असल में घरेलू दर्शकों के लिए है — जनता को दिखाना है कि 'हम कमज़ोर नहीं हैं।' लेकिन हक़ीक़त यह है कि 2023 से अब तक पाकिस्तान में TTP के हमलों में कम से कम 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पाक सेना के अपने आँकड़े बताते हैं कि हर हफ़्ते कम से कम दो से तीन बड़े हमले हो रहे हैं — खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक, और अब कराची जैसे बड़े शहर भी निशाने पर हैं। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि पाक फ़ौज का बजट पहले ही देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ है, और इस तरह की सीमा-पार कार्रवाइयाँ लंबे समय तक चलाना उसकी आर्थिक हालत में सम्भव नहीं। (यह इंडस्ट्री/रक्षा हलकों की चर्चा और विश्लेषण पर आधारित है, पुष्ट आधिकारिक आँकड़े नहीं।)

फुसफुसाहट यह भी है कि इस्लामाबाद में सिविल-मिलिट्री रिश्ते पहले से तनाव में हैं और इस तरह के 'ऑपरेशन' सेना प्रमुख की कुर्सी बचाने की रणनीति का हिस्सा हैं — सरकार से ज़्यादा बजट माँगने का बहाना चाहिए, तो एक 'युद्ध जैसा माहौल' बनाओ। आम पाकिस्तानी नागरिक की नब्ज़ टटोलें तो सोशल मीडिया पर ग़ुस्सा और हताशा दोनों दिख रहे हैं — लोग पूछ रहे हैं कि अगर सेना इतनी ताक़तवर है, तो कराची में 29 जवान कैसे मारे गए?

भस्मासुर की कहानी — पाकिस्तान ने ख़ुद कैसे खोदा अपना गड्ढा

यह कहानी 1980 के दशक से शुरू होती है जब पाकिस्तान ने अमेरिकी पैसों से अफगानिस्तान में मुजाहिदीन खड़े किए — सोवियत संघ के ख़िलाफ़। उसके बाद तालिबान, फिर TTP — हर दशक में एक नया 'प्रॉक्सी' बनाया गया, और हर बार वो प्रॉक्सी आख़िरकार पाकिस्तान के ही ख़िलाफ़ मुड़ गया। यह 'भस्मासुर सिंड्रोम' अब इतना गहरा हो चुका है कि पाकिस्तानी सेना के पास कोई अच्छा विकल्प बचा ही नहीं — अफगानिस्तान पर हमला करो तो तालिबान नाराज़, न करो तो TTP और मज़बूत।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में इस विडम्बना को रेखांकित किया है — पाकिस्तान जो ख़ुद को 'शांतिदूत' कहता है, वही अब बिना किसी अंतरराष्ट्रीय मंज़ूरी के दूसरे देश की सरज़मीन पर बम बरसा रहा है। अफगान तालिबान सरकार ने अभी तक इस कार्रवाई पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अतीत में ऐसी कार्रवाइयों के बाद काबुल ने कड़ी आपत्ति जताई है और जवाबी कार्रवाई की धमकी भी दी है।

भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?

यहाँ इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड साफ़ है — पाकिस्तान की यह आंतरिक बदहाली भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर भी है और एक चेतावनी भी। अवसर इसलिए कि जब तक TTP पाकिस्तान की सेना को भीतर से खाता रहेगा, इस्लामाबाद का कश्मीर पर फ़ोकस कमज़ोर होता जाएगा। लेकिन चेतावनी इसलिए कि एक अस्थिर, परमाणु-सम्पन्न पड़ोसी जो अपने ही आतंकवादियों को नहीं रोक पा रहा — वो किसी भी दिन एक बड़ा सुरक्षा संकट बन सकता है। भारतीय रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि नई दिल्ली को LOC पर सतर्कता बढ़ानी चाहिए क्योंकि जब भी पाकिस्तान भीतर से कमज़ोर होता है, बाहर 'विचलन' (डायवर्ज़न) की संभावना बढ़ जाती है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट से जो तस्वीर उभरती है, वो और भी चिंताजनक है — पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से IMF के सहारे चल रही है, और ऐसे में अफगानिस्तान से एक नए मोर्चे पर टकराव का ख़र्चा कौन उठाएगा? चीन शायद कुछ मदद करे — लेकिन बीजिंग भी बलूचिस्तान में CPEC पर बार-बार हो रहे हमलों से नाराज़ है।

आगे क्या होगा — तीन बातें जो अब देखनी हैं

पहला, अफगान तालिबान की आधिकारिक प्रतिक्रिया — अगर काबुल ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी, तो यह पाकिस्तान-अफगानिस्तान सम्बन्धों में 2025-26 का सबसे बड़ा टूटन बिंदु होगा। दूसरा, TTP का अगला बड़ा हमला — इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान की हर 'ज़ोरदार कार्रवाई' के बाद TTP और भीषण हमले से जवाब देता है। तीसरा, अमेरिका और चीन की भूमिका — वॉशिंगटन पहले ही पाकिस्तान से दूरी बना रहा है, और अगर यह संघर्ष बढ़ा तो इस्लामाबाद कूटनीतिक रूप से और अकेला पड़ जाएगा।

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सच यह है कि कराची का हमला कोई अचानक की घटना नहीं — यह दशकों की प्रॉक्सी पॉलिटिक्स का ब्याज है जो अब मूलधन खा रहा है। पाकिस्तान अफगानिस्तान पर जितने बम गिराए, वो TTP की विचारधारा पर एक खरोंच भी नहीं डालेंगे। जब तक इस्लामाबाद यह नहीं मानता कि असली दुश्मन सीमा पार नहीं बल्कि उसकी अपनी 'आतंक को हथियार बनाने' की नीति है — तब तक यह चक्र टूटने वाला नहीं। सवाल यह है — क्या कंगाली और ख़ून से लथपथ पाकिस्तानी सेना अब भी यह सच स्वीकार करने को तैयार होगी, या अगले हमले तक एक और 'बदले की कार्रवाई' का ड्रामा चलता रहेगा?

आँकड़ों में

  • पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान सीमा पर ग्राउंड ऑपरेशन में 29 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया — हिंदुस्तान टाइम्स, तेलंगाना टुडे
  • कराची हमले में पाक सुरक्षाबलों के दर्जनों जवान हताहत — टाइम्स ऑफ इंडिया
  • 2023 से पाकिस्तान में TTP हमलों में लगभग 60% बढ़ोतरी — रक्षा विश्लेषकों का अनुमान

मुख्य बातें

  • कराची हमले के ठीक एक दिन बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा पर ग्राउंड ऑपरेशन में 29 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया — हिंदुस्तान टाइम्स रिपोर्ट
  • पाकिस्तान ने अफगान तालिबान सरकार पर TTP को शरण देने का आरोप लगाया — वही तालिबान जिसे कभी पाकिस्तानी सेना ने सत्ता तक पहुँचाया था — टाइम्स ऑफ इंडिया
  • 2023 से TTP हमलों में कम से कम 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज — विश्लेषकों का अनुमान, अब कराची जैसे बड़े शहर भी निशाने पर
  • भारत के लिए यह रणनीतिक अवसर भी है और चेतावनी भी — अस्थिर परमाणु-सम्पन्न पड़ोसी एक बड़ा सुरक्षा जोखिम
  • अफगान तालिबान की जवाबी प्रतिक्रिया, TTP का अगला बड़ा हमला और अमेरिका-चीन की भूमिका — ये तीन बातें अब निगरानी में

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कराची हमले के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमला क्यों किया?

पाकिस्तान का कहना है कि TTP आतंकियों को अफगान तालिबान शरण दे रहा है। कराची हमले के एक दिन बाद पाक सेना ने सीमा पार ग्राउंड ऑपरेशन चलाकर 29 आतंकियों को मारने का दावा किया — हिंदुस्तान टाइम्स रिपोर्ट। विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई घरेलू जनता को सेना की ताक़त दिखाने और नाकामी से ध्यान भटकाने का शो भी है।

TTP क्या है और पाकिस्तान से इसका क्या रिश्ता है?

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) अफगान तालिबान से जुड़ा एक आतंकवादी संगठन है जो पाकिस्तान के भीतर हमले करता है। पाकिस्तान ने दशकों तक तालिबान इकोसिस्टम को पाला और अब TTP उसी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लड़ रहा है — इसे 'भस्मासुर सिंड्रोम' कहा जाता है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव का भारत पर क्या असर होगा?

भारतीय रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, TTP में उलझी पाक सेना का कश्मीर पर फ़ोकस कमज़ोर होगा — यह भारत के लिए रणनीतिक अवसर है। लेकिन एक अस्थिर, परमाणु-सम्पन्न पड़ोसी किसी भी दिन सुरक्षा संकट बन सकता है, इसलिए LOC पर सतर्कता ज़रूरी है।

पाकिस्तान की अफगानिस्तान बॉर्डर कार्रवाई में कितने आतंकी मारे गए?

पाकिस्तानी सेना के अनुसार सीमा पार ग्राउंड ऑपरेशन में 29 आतंकवादी मारे गए — यह दावा तेलंगाना टुडे और हिंदुस्तान टाइम्स दोनों ने रिपोर्ट किया है।

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