नीतीश कुमार ने कहा की हमेशा से ही मेरा सार्वजनिक रिकॉर्ड पारदर्शी रहा है| किसी मसले पर अगर मैं लोगों को वचन देता हूं तो अपना सर्वश्रेष्ठ उसमें लगता हूँ और पूरा करता हूँ| पिछले साल मैंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एलान किया था कि यदि हम फिर से सत्ता में आते हैं तो हम शराब पर पाबंदी लागू करेंगे| इसको अमलीजामा पहनाना काफी कठिन कार्य था| वैसे तो कार्य के सारे ही कार्य आसान नहीं होते|
परंतु शराब पर पाबंदी का मुद्दा अलग था क्योंकि पहले कभी भी इस मामले पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने में कामयाब नहीं हो सका| इसी वजह से अन्य की तुलना में शराब लॉबी इस एक तथ्य से सर्वाधिक प्रसन्न होती रही है| अधिकारवादी शख्सियत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के रूप में किसी भी सूरत में कल्पना नहीं की जा सकती| उन्होंने 1931 में 'यंग इंडिया' में लिखा, "यदि मुझे एक घंटे के लिए पूरे भारत का तानाशाह बना दिया जाए तो बिना मुआवजे के सभी शराब की दुकानों पर बंद करना मेरा सबसे पहला काम होगा|"
इस मसले पर उनके अन्य उद्धरण भी कमोबेश ऐसे ही तीखे हैं-मसलन, "जो देश शराब के नशे का आदी है, उसका सितारा डूब गया है| इतिहास गवाह है कि इस आदत की वजह से बड़े-बड़े साम्राज्य नष्ट हो गए हैं|" शराब पर पाबंदी के संबंध में संविधान में वर्णित राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में भी इसे राज्य को उद्यम करने को कहा गया है|
सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा है कि "मादक पदार्थों के बिजनेस या व्यापार का कोई मौलिक अधिकार नहीं है| राज्य को अपनी नियामक शक्तियों के तहत मादक पदार्थों के किसी भी रूप के निर्माण, भंडारण, आयात, निर्यात, बिक्री और कब्जे पर पाबंदी लगाने का अधिकार है|" इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है, "नियंत्रण की शक्ति समाज के आत्म-रक्षा के अधिकार को बताती है और लोगों के स्वास्थ्य, कल्याण और नैतिकता के लिए राज्य के अधिकार में यह निहित है|"