पेनेलोपी क्रूज़ ने छीन ली 'द इनवाइट' — क्या ओलिविया वाइल्ड ने डायरेक्टर की कुर्सी एक्ट्रेस को सौंप दी?

Singh Anchala

ओलिविया वाइल्ड की 'द इनवाइट' एक रिलेशनशिप ड्रामा है जहाँ पेनेलोपी क्रूज़ का अभिनय पूरी फ़िल्म पर हावी है। द इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षा के अनुसार क्रूज़ ने शो चुरा लिया है, हालाँकि फ़िल्म की पटकथा में गहराई की कमी खटकती है।

एक डिनर टेबल। दो लोग। और बीच में वो सन्नाटा जो किसी रिश्ते की सबसे ख़तरनाक आवाज़ होती है। पेनेलोपी क्रूज़ की आँखों में वो सन्नाटा बोलता है — इतनी ताक़त से कि 'द इनवाइट' की पटकथा, उसकी डायरेक्शन, उसका बाक़ी सब कुछ पीछे छूट जाता है।

ओलिविया वाइल्ड की नई फ़िल्म 'द इनवाइट' एक रिलेशनशिप ड्रामा है — शांत सतह, भीतर उबलता लावा। द इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षा में इसे ऐसी फ़िल्म बताया गया है जहाँ पेनेलोपी क्रूज़ ने पूरा शो चुरा लिया है। और यही बात इस फ़िल्म की सबसे बड़ी ताक़त भी है, और शायद सबसे बड़ी कमज़ोरी भी।

वाइल्ड का करियर उतार-चढ़ाव का दिलचस्प नक़्शा है। 'बुकस्मार्ट' (2019) ने उन्हें आलोचकों की चहेती बनाया — ताज़ा, बेबाक, नई आवाज़। फिर आई 'डोन्ट वरी डार्लिंग' (2022), जो फ़िल्म से ज़्यादा अपने सेट के ड्रामे के लिए चर्चा में रही — फ़्लोरेंस प्यू से तनाव, शिया लबूफ़ की बर्ख़ास्तगी, हैरी स्टाइल्स के साथ रिश्ते की सुर्ख़ियाँ। फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर ठीक-ठाक रही, लेकिन आलोचकों ने कहा कि वाइल्ड ने विज़ुअल स्टाइल को कहानी की गहराई पर तरजीह दी। 'द इनवाइट' में वाइल्ड ने स्केल छोटा किया, स्पेक्टेकल हटाया, और शुद्ध अभिनय पर भरोसा जताया। यह फ़ैसला समझदारी का था — लेकिन क्या उन्होंने अपनी ही फ़िल्म की चाबी अपनी लीड एक्ट्रेस को दे दी?

इनसाइड टॉक

इंडस्ट्री हलकों में चर्चा है कि वाइल्ड ने 'डोन्ट वरी डार्लिंग' के विवादों के बाद जानबूझकर ऐसा प्रोजेक्ट चुना जहाँ कोई सेट-ड्रामा न हो — और पेनेलोपी क्रूज़ जैसी सीज़्नड प्रोफ़ेशनल के साथ वो सुकून मिला। ट्रेड सर्कल में यह भी कहा जा रहा है कि क्रूज़ की कास्टिंग ही प्रोजेक्ट को ग्रीनलाइट करवाने का टर्निंग पॉइंट थी — बिना उनके नाम के यह फ़िल्म फ़ाइनेंसिंग के लिए जूझ सकती थी। फ़ैन्स के बीच एक और बात गूँज रही है: क्या क्रूज़ का ये रोल उन्हें इस साल के अवॉर्ड सीज़न में दौड़ में ला सकता है? (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

क्रूज़ का जादू — जहाँ स्क्रिप्ट चुप है, वहाँ आँखें बोलती हैं

पेनेलोपी क्रूज़ का करियर ही उनकी क्रेडेंशियल है — पेद्रो अल्मोदोवार की म्यूज़, 'वॉल्वर' और 'पैरेलल मदर्स' में वो परफ़ॉर्मेंसेज़ जो सालों बाद याद आती हैं, 2009 में 'विकी क्रिस्टीना बार्सिलोना' के लिए ऑस्कर। समीक्षकों के अनुसार 'द इनवाइट' में क्रूज़ ने एक ऐसी स्त्री को जीवंत किया है जो प्यार में टूटने और फिर ख़ुद को जोड़ने के बीच की उस पतली रेखा पर चलती है। द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि क्रूज़ ने शो चुरा लिया — और यह कोई मामूली तारीफ़ नहीं, क्योंकि वाइल्ड ने कास्टिंग में कोई कमी नहीं छोड़ी थी।

यहाँ सवाल दिलचस्प है: जब कोई एक्टर इतना ऊपर उठ जाए कि फ़िल्म उनकी शोरील जैसी लगने लगे, तो क्या यह डायरेक्टर की सफलता है या विफलता? यही वो सवाल है जो इंडिया हेराल्ड की नज़र में 'द इनवाइट' को एक साधारण रिलेशनशिप ड्रामा से अलग करता है। वाइल्ड ने क्रूज़ को वो ज़मीन दी जहाँ वो खिल सकें — लेकिन उस ज़मीन पर और कुछ उगा नहीं।

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स्क्रिप्ट की ख़ामोशी — जहाँ फ़िल्म ठहर जाती है

समीक्षाओं के अनुसार 'द इनवाइट' की पटकथा वो गहराई नहीं दे पाती जो इसके विषय की माँग है। रिलेशनशिप ड्रामा एक ख़तरनाक ज़ॉनर है — इसमें हर डायलॉग को सतह पर साधारण और भीतर से विध्वंसक होना चाहिए। रिचर्ड लिंकलेटर की 'बिफ़ोर' ट्रिलॉजी या इंगमार बर्गमैन की 'सीन्स फ़्रॉम अ मैरिज' इसीलिए मास्टरपीस हैं — हर शब्द में दोहरी धार है। 'द इनवाइट' में वो धार जगह-जगह भोथरी पड़ती दिखती है, और क्रूज़ को अपने अभिनय से उन ख़ालीपन को भरना पड़ता है।

भारतीय दर्शकों के लिए यह दिलचस्प इसलिए भी है क्योंकि हिंदी सिनेमा में रिलेशनशिप ड्रामा हमेशा से एक अंडररेटेड ज़ॉनर रहा है — 'मसान' से लेकर 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' तक, भारतीय फ़िल्ममेकर्स ने दिखाया है कि रिश्तों की कहानियाँ बॉक्स ऑफ़िस पर भी चल सकती हैं अगर लेखन में दम हो। वाइल्ड की फ़िल्म उस लेखन की कसौटी पर कमज़ोर पड़ती है।

ओलिविया वाइल्ड का कमबैक रिपोर्ट कार्ड

वाइल्ड के लिए 'द इनवाइट' एक ज़रूरी फ़िल्म थी। 'डोन्ट वरी डार्लिंग' के बाद हॉलीवुड में उनकी छवि एक प्रतिभाशाली लेकिन अस्थिर डायरेक्टर की बन गई थी। 'द इनवाइट' उस छवि को तोड़ने का मौक़ा थी — और कुछ हद तक उन्होंने वो किया भी। फ़िल्म में विज़ुअल कंपोज़िशन सुंदर है, इंटिमेट सीन्स में एक ठहराव है जो वाइल्ड की डायरेक्टोरियल सेंस दिखाता है। लेकिन समीक्षकों का कहना है कि कुल मिलाकर फ़िल्म क्रूज़ के कंधों पर ज़्यादा और वाइल्ड के विज़न पर कम टिकी है।

आने वाले हफ़्तों में देखना होगा कि अवॉर्ड सीज़न की बातचीत में 'द इनवाइट' कहाँ खड़ी होती है। अगर क्रूज़ को बेस्ट एक्ट्रेस की दौड़ में शामिल किया जाता है — जो कि समीक्षाओं के आधार पर संभव दिखता है — तो यह फ़िल्म वाइल्ड के करियर के लिए एक अजीब विरासत छोड़ेगी: एक ऐसी फ़िल्म जिसने उनकी एक्ट्रेस को चमकाया, लेकिन ख़ुद उनकी डायरेक्टोरियल पहचान को और धुँधला कर दिया।

और शायद यही 'द इनवाइट' का सबसे ईमानदार रिव्यू है — कि कभी-कभी सबसे बड़ी महमाननवाज़ी यह होती है कि आप अपने मेहमान को इतनी जगह दे दें कि लोग घर का पता भूल जाएँ, बस मेहमान को याद रखें।

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मुख्य बातें

  • पेनेलोपी क्रूज़ का अभिनय 'द इनवाइट' की सबसे बड़ी ताक़त है — समीक्षकों के अनुसार उन्होंने शो चुरा लिया।
  • ओलिविया वाइल्ड का यह 'डोन्ट वरी डार्लिंग' के बाद कमबैक प्रोजेक्ट था, लेकिन स्क्रिप्ट की कमज़ोरी ने डायरेक्शन की चमक को सीमित किया।
  • फ़िल्म अवॉर्ड सीज़न में क्रूज़ को बेस्ट एक्ट्रेस की दौड़ में ला सकती है, जो वाइल्ड के लिए मिली-जुली विरासत होगी।
  • रिलेशनशिप ड्रामा ज़ॉनर में स्क्रिप्ट की गहराई सबसे अहम है — बिना तेज़ लेखन के बेहतरीन एक्टिंग भी फ़िल्म को पूर्ण नहीं बना सकती।

आँकड़ों में

  • पेनेलोपी क्रूज़ ने 2009 में 'विकी क्रिस्टीना बार्सिलोना' के लिए ऑस्कर जीता — 'द इनवाइट' उनके करियर की एक और संभावित अवॉर्ड-नॉमिनेशन परफ़ॉर्मेंस मानी जा रही है।
  • ओलिविया वाइल्ड की पिछली फ़िल्म 'डोन्ट वरी डार्लिंग' (2022) बॉक्स ऑफ़िस पर लगभग $87 मिलियन कमाने के बावजूद मिली-जुली आलोचना मिली थी।

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