'गदर' के ₹1000 करोड़ के बाद सनी देओल ने कोर्टरूम चुना — 'इक्का' क्या बता रही है मास किंग के भविष्य के बारे में?
सनी देओल की 'इक्का' कोर्टरूम ड्रामा है जहाँ उन्होंने अक्षय खन्ना के साथ संयमित अभिनय किया है। द हिंदू के अनुसार दोनों ने 'पुराने उस्ताद' की भूमिका पूरे यकीन से निभाई है, लेकिन मिले-जुले रिव्यू बता रहे हैं कि यह प्रयोग सनी के मास बेस के लिए अपेक्षित 'गदर मैजिक' से बहुत अलग है।
एक हज़ार करोड़ रुपये। यह कोई बजट नहीं, यह वो ज़ंजीर है जो 'गदर 2' ने सनी देओल के गले में डाल दी। उस ब्लॉकबस्टर के बाद हर अगली फिल्म एक परीक्षा बन गई — क्या सनी अब सिर्फ़ 'तारा सिंह' ही बनेंगे, या कुछ और भी हो सकते हैं? 'इक्का' इसी सवाल का जवाब है, और उस जवाब की जो तस्वीर बन रही है, वो बॉलीवुड के सबसे पुराने सवाल से टकराती है: जनता किसी स्टार को 'बदलने' की इजाज़त कब देती है?
द हिंदू की समीक्षा में फिल्म का शीर्षक ही कहानी कह देता है — "Sunny Deol and Akshaye Khanna play an old hand with conviction." यहाँ 'ओल्ड हैंड' शब्द चुनना अनायास नहीं है। दोनों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं में वो परिपक्वता दिखाई जो दशकों के अनुभव से आती है। सनी ने चिल्लाना बंद किया — न कोई "धाई किलो का हाथ", न बॉर्डर पर गोली — सिर्फ़ एक वकील जो दलील से लड़ता है। अक्षय खन्ना, जिन्हें इंडस्ट्री ने बहुत पहले 'एक्टर्स एक्टर' का ख़िताब दे दिया था, यहाँ सनी को बराबरी की टक्कर देते हैं।
लेकिन तारीफ़ के बावजूद 'इक्का' के रिव्यू मिले-जुले क्यों हैं? यहीं पर बात दिलचस्प होती है। कोर्टरूम ड्रामा भारतीय सिनेमा में एक जोखिम भरा दाँव है — 'जॉली एलएलबी' जैसी कॉमेडी चल जाती है, 'पिंक' जैसा सामाजिक बयान चल जाता है, लेकिन सीधी क़ानूनी तकरार जिसमें न गाना हो, न ऐक्शन सीक्वेंस, न मास पंच — वो हिंदी बेल्ट के सिंगल स्क्रीन दर्शक को कुर्सी पर बिठाए रखना मुश्किल काम है। और सनी देओल का मास बेस? वो तो उन्हीं सिंगल स्क्रीन्स पर बैठता है।
इनसाइड टॉक
ट्रेड हलकों में चर्चा है कि 'इक्का' का बजट जानबूझकर 'गदर 2' से बहुत कम रखा गया — अंदाज़ा ₹40-50 करोड़ के दायरे में है। मार्केटिंग भी सोची-समझी थी: कोई देशभक्ति वाला हुक नहीं, कोई 15 अगस्त-26 जनवरी वाली रिलीज़ टाइमिंग नहीं। इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि प्रोड्यूसर्स ने शुरू से ही ओटीटी रिकवरी को प्लान B रखा था — और 123Telugu की रिपोर्ट के अनुसार Netflix ने 'इक्का' के स्ट्रीमिंग राइट्स पहले ही ले लिए हैं। यह अपने आप में एक बड़ा संकेत है: मेकर्स को शायद पता था कि बॉक्स ऑफ़िस पर 'गदर' जैसा धमाल होने वाला नहीं है।
फ़ैन्स के बीच एक और बहस चल रही है। कुछ मानते हैं कि सनी ने 'साहसिक कदम' उठाया — कि ₹1000 करोड़ की सफलता के बाद भी फ़ॉर्मूला दोहराने की बजाय कुछ अलग करने की हिम्मत दिखाई। लेकिन दूसरा पक्ष कहता है कि यह 'हिम्मत' नहीं, 'मिसरीडिंग' है — कि सनी ने अपने उस दर्शक को नहीं समझा जो 'तारा सिंह 3' चाहता था, कोर्ट का ड्रामा नहीं। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
सनी देओल का 'रीइन्वेंशन' जाल
बॉलीवुड का इतिहास गवाह है — मास हीरो का 'रीइन्वेंशन' सबसे ख़तरनाक खेल है। अमिताभ बच्चन ने 2000 के दशक में 'ब्लैक' और 'पा' से अपना कायाकल्प किया, लेकिन उससे पहले उन्होंने 'केबीसी' के ज़रिए दर्शकों की नई पीढ़ी से रिश्ता बनाया था। सलमान ख़ान ने 'बजरंगी भाईजान' जैसी फिल्म की, पर उसमें भी 'भाई' वाला चार्म बरकरार था। सनी के सामने समस्या यह है कि 'गदर' श्रृंखला ने उनकी पहचान को इतना एकरंगी बना दिया कि बाहर निकलने का रास्ता बहुत सँकरा है।
इंडिया हेराल्ड का मानना है कि 'इक्का' का असली महत्व बॉक्स ऑफ़िस नंबर्स में नहीं, बल्कि उस सवाल में है जो यह इंडस्ट्री के सामने रखती है: क्या हिंदी बेल्ट का दर्शक — वही यूपी-बिहार-राजस्थान का सिंगल-स्क्रीन वाला — अपने मास हीरो को 'ग्रो' करने देगा, या उसे हमेशा उसी खाँचे में रखना चाहेगा? यह सवाल सिर्फ़ सनी का नहीं, अजय देवगन, अक्षय कुमार और यहाँ तक कि सलमान ख़ान का भी है।
अक्षय खन्ना — अनदेखा पहलू
अक्षय खन्ना की बात किए बिना 'इक्का' अधूरी है। एक ऐसा अभिनेता जिसे 'डिल चाहता है', 'बॉर्डर' और 'तालाश' जैसी फिल्मों के लिए आलोचकों ने सराहा, लेकिन बॉक्स ऑफ़िस ने कभी 'स्टार' का दर्जा नहीं दिया। द हिंदू की समीक्षा में 'कन्विक्शन' शब्द दोनों के लिए इस्तेमाल हुआ — यह बताता है कि अक्षय खन्ना ने इस फिल्म में सनी के बराबर वज़न उठाया। ट्रेड की माने तो अक्षय की मौजूदगी ही फिल्म को 'सिर्फ़ मास' से ऊपर उठाती है — पर यही बात मास दर्शक के लिए समस्या भी बन सकती है जो अक्षय खन्ना को उतना नहीं जानता।
आगे क्या?
अगर 'इक्का' बॉक्स ऑफ़िस पर ठंडी रहती है — जो ट्रेड अनुमानों के अनुसार संभावित दिख रहा है — तो 123Telugu की रिपोर्ट के मुताबिक़ Netflix पर स्ट्रीमिंग इसकी दूसरी ज़िंदगी हो सकती है। ओटीटी पर कोर्टरूम ड्रामा का दर्शक अलग है — शहरी, धैर्यवान, कहानी-केंद्रित। वहाँ 'इक्का' को वो सम्मान मिल सकता है जो सिनेमाघरों में मुश्किल है।
लेकिन सनी देओल के करियर के लिए बड़ा सवाल यह है: अगली फिल्म क्या होगी? अगर 'इक्का' के बाद वो सीधे 'गदर 3' की ओर लौटते हैं, तो यह कोर्टरूम प्रयोग एक फुटनोट बनकर रह जाएगा — '90 के दशक में अमिताभ की कुछ भूली फिल्मों जैसा। लेकिन अगर वो इस रास्ते पर टिकते हैं, कुछ और परिपक्व भूमिकाएँ लेते हैं, तो आने वाले दो-तीन सालों में बॉलीवुड के सबसे दिलचस्प 'लेट-करियर आर्क' में से एक बन सकते हैं।
अभी तो स्थिति यह है कि सनी देओल एक चौराहे पर खड़े हैं — एक तरफ़ ₹1000 करोड़ का सुरक्षित फ़ॉर्मूला, दूसरी तरफ़ अभिनेता के रूप में 'बड़ा' होने का जोखिम भरा सफ़र। 'इक्का' ने वो दरवाज़ा खोला ज़रूर है, पर उसमें से गुज़रने की क़ीमत क्या होगी — यह फ़ैसला दर्शक करेगा, सनी नहीं।
इस रिपोर्ट में उल्लिखित आरोप/दावे नामित स्रोतों के हवाले से हैं; जब तक अदालत ने फ़ैसला नहीं सुनाया, वे अप्रमाणित हैं।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- द हिंदू के अनुसार सनी देओल और अक्षय खन्ना ने 'इक्का' में 'ओल्ड हैंड विद कन्विक्शन' वाला संयमित अभिनय दिया — लेकिन रिव्यू मिले-जुले हैं।
- 'इक्का' का बजट और मार्केटिंग 'गदर 2' से जानबूझकर बिल्कुल अलग रखी गई; 123Telugu के अनुसार Netflix ने स्ट्रीमिंग राइट्स पहले ही ख़रीद लिए हैं — मेकर्स ने ओटीटी रिकवरी को शुरू से प्लान किया।
- सनी देओल का असली इम्तिहान 'इक्का' के नंबर नहीं, बल्कि यह है कि वे 'गदर' फ़ॉर्मूले से बाहर निकलकर लेट-करियर रीइन्वेंशन कर पाते हैं या नहीं।
- अक्षय खन्ना की कास्टिंग ने फिल्म को 'सिर्फ़ मास' से ऊपर उठाया, पर यही बात हिंदी बेल्ट के सिंगल-स्क्रीन दर्शक के लिए चुनौती भी बनी।
आँकड़ों में
- 'गदर 2' ने ₹1000 करोड़+ का कलेक्शन किया था — सनी देओल के करियर की अब तक की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलता।
- 123Telugu की रिपोर्ट के अनुसार Netflix ने 'इक्का' के डिजिटल स्ट्रीमिंग राइट्स हासिल किए हैं।