2 दिन में सिर्फ ₹20 करोड़ — क्या 'अल्फा' ने YRF स्पाई यूनिवर्स की असली कमज़ोरी उघाड़ दी?
आलिया भट्ट और शर्वरी अभिनीत 'अल्फा' ने भारत में दो दिनों में करीब ₹20 करोड़ नेट कलेक्शन किया है। पठान और टाइगर 3 की ओपनिंग से तुलना करें तो यह YRF स्पाई यूनिवर्स का अब तक का सबसे कमज़ोर आगाज़ है, जो इस फ्रैंचाइज़ी मॉडल की ब्रांड-वैल्यू पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
₹20 करोड़। दो दिन। YRF का सबसे महँगा स्पाई यूनिवर्स दाँव। और नतीजा? वो आँकड़ा जो पठान ने अपने पहले दिन के पहले शो ख़त्म होने से पहले ही पार कर लिया था। आलिया भट्ट और शर्वरी की 'अल्फा' के शुरुआती नंबर सिर्फ एक फिल्म की कहानी नहीं बता रहे — ये YRF के पूरे फ्रैंचाइज़ी मॉडल की नींव पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
Bollywood Hungama की रिपोर्ट के अनुसार 'अल्फा' ने ओपनिंग डे पर नेशनल चेन्स में महज़ 35,000 के करीब टिकटें बेचीं और लगभग ₹7 करोड़ की नेट ओपनिंग दर्ज की। Pinkvilla ने दो दिनों का कुल कलेक्शन करीब ₹20 करोड़ नेट बताया है। अब इन आँकड़ों को ज़रा स्पाई यूनिवर्स के बाकी सदस्यों के बग़ल में रखिए: पठान ने जनवरी 2023 में पहले ही दिन ₹57 करोड़ नेट समेटे थे, टाइगर 3 ने नवंबर 2023 में ₹44 करोड़ से शुरुआत की थी, और वॉर ने 2019 में ₹53 करोड़ का ओपनिंग डे दर्ज किया था। 'अल्फा' का दो दिन का कलेक्शन इनमें से किसी के भी पहले दिन की बराबरी नहीं कर पाया।
यह अंतर सिर्फ संख्याओं का नहीं, परसेप्शन का है। स्पाई यूनिवर्स का पूरा मॉडल इस भरोसे पर टिका है कि 'ब्रांड' अकेला काफ़ी है दर्शकों को खींचने के लिए — चाहे स्टार कोई भी हो, कहानी कैसी भी हो। पठान में शाहरुख की वापसी का तूफ़ानी जज़्बा था, टाइगर में सलमान की मास अपील। लेकिन 'अल्फा' ने पहली बार इस फ्रैंचाइज़ी को बिना उस 'मेल सुपरस्टार सेफ्टी नेट' के परखा — और बाज़ार ने अपना जवाब दे दिया।
इनसाइड टॉक
ट्रेड हलकों में चर्चा है कि 'अल्फा' का बजट ₹150-200 करोड़ के बीच बताया जाता है। अगर यह सच है, तो ₹20 करोड़ की दो-दिवसीय शुरुआत के बाद ब्रेक-ईवन तक पहुँचना लगभग असंभव दिखता है। इंडस्ट्री की बात यह है कि YRF ने इस प्रोजेक्ट पर इतना बड़ा दाँव इसलिए लगाया क्योंकि उन्हें भरोसा था कि आलिया भट्ट का नाम और स्पाई यूनिवर्स का टैग मिलकर वही जादू करेंगे जो शाहरुख या सलमान के नाम ने किया। लेकिन फ़ैन्स मानते हैं कि समस्या आलिया या शर्वरी नहीं, बल्कि वह फॉर्मूला है जो अब दर्शकों को उबाऊ लगने लगा है — वही चेज़ सीक्वेंस, वही गैजेट्स, वही 'देशभक्ति + एक्शन' का कॉकटेल।
सोशल मीडिया पर घूमता सवाल यह भी है कि क्या बॉलीवुड की ऑडियंस अभी भी फीमेल-लीड एक्शन फिल्मों के लिए तैयार है, या फिर यह सिर्फ स्क्रिप्ट और एक्ज़ीक्यूशन की कमज़ोरी है। 123Telugu की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म को रिलीज़ के दिन से ही नेगेटिव वर्ड-ऑफ-माउथ झेलना पड़ा, जिसने दूसरे दिन की ग्रोथ को भी सीमित कर दिया। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
असली सवाल: फ्रैंचाइज़ी थकान या जेंडर बायस?
इस सवाल का जवाब इतना सरल नहीं। एक तरफ़ रणवीर सिंह की 'धुरंधर: द रिवेंज' देखिए — Pinkvilla के अनुसार 50 दिनों में ₹977 करोड़ नेट तक पहुँच चुकी है। रितेश देशमुख की 'राजा शिवाजी' ने पहले हफ़्ते में ही ₹61 करोड़ कमा लिए। यानी दर्शक सिनेमाघर जा रहे हैं — बस 'अल्फा' के लिए नहीं जा रहे।
दूसरी तरफ़, इंडिया हेराल्ड का यह आकलन है कि असली समस्या जेंडर नहीं, फ्रैंचाइज़ी की क्रिएटिव थकान है। YRF ने स्पाई यूनिवर्स को एक 'प्रोडक्ट लाइन' की तरह ट्रीट किया — जहाँ हर फिल्म एक ही साँचे में ढली है। पठान की कामयाबी शाहरुख की वापसी का इवेंट थी, टाइगर 3 सलमान की ब्रांड लॉयल्टी पर टिकी थी। जब वह स्टार-पावर हटी, तो 'यूनिवर्स' का खोखलापन सामने आ गया। आलिया भट्ट ख़ुद एक सशक्त ब्रांड हैं — 'गंगूबाई काठियावाड़ी' और 'राज़ी' ने यह साबित किया है। लेकिन जब एक सिद्ध कलाकार को एक थके हुए फॉर्मूले में फिट किया जाए, तो नतीजा न स्टार का होता है, न फ्रैंचाइज़ी का — बल्कि दोनों को नुक़सान होता है।
आगे क्या: स्पाई यूनिवर्स का भविष्य दाँव पर
अगर 'अल्फा' पहले हफ़्ते में ₹50 करोड़ के आसपास भी नहीं पहुँचती — और मौजूदा ट्रेंड यही इशारा करता है — तो YRF के सामने कुछ कड़े फ़ैसले होंगे। क्या टाइगर vs पठान जैसी प्लान्ड क्रॉसओवर फिल्में अब भी बनेंगी? क्या बजट का पैमाना घटाया जाएगा? या फिर यह 'यूनिवर्स' चुपचाप शेल्फ़ पर रख दिया जाएगा, जैसे बॉलीवुड में कई महत्वाकांक्षी फ्रैंचाइज़ी प्लान पहले भी दफ़न हुए हैं?
ट्रेड विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले हफ़्ते 'अल्फा' को और तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा। 'राजा शिवाजी' पहले से दर्शकों को खींच रही है, 'माइकल' बायोपिक ने Pinkvilla के मुताबिक 14 दिनों में ₹52 करोड़ ग्रॉस कमा लिए हैं, और 'धुरंधर' अभी भी स्क्रीन्स पर क़ब्ज़ा जमाए हुए है।
सबसे बड़ी बात यह है कि बॉलीवुड में फ्रैंचाइज़ी मॉडल अभी शैशवावस्था में है। हॉलीवुड के MCU ने दशकों में भरोसा बनाया — एक-एक कड़ी को क्वालिटी से साबित किया, तब जाकर दर्शकों ने 'यूनिवर्स' के नाम पर अंधा भरोसा करना शुरू किया। YRF ने तीन-चार फिल्मों में ही वह भरोसा माँग लिया, बिना उसे कमाए। 'अल्फा' के नंबर बता रहे हैं कि भारतीय दर्शक इतने भोले नहीं।
आख़िर में सवाल यह नहीं है कि आलिया भट्ट ₹200 करोड़ की फिल्म कैरी कर सकती हैं या नहीं — सवाल यह है कि क्या कोई भी स्टार एक ऐसी फ्रैंचाइज़ी को बचा सकता है जिसने अपनी कहानियों से ज़्यादा अपने 'ब्रांड' पर भरोसा किया। और इसका जवाब, फ़िलहाल, बॉक्स ऑफिस बहुत साफ़ दे रहा है।
आरोपों और दावों को यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से प्रस्तुत किया गया है; जब तक कोर्ट का फ़ैसला न हो, ये अप्रमाणित रहते हैं।
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मुख्य बातें
- 'अल्फा' का दो दिन का ₹20 करोड़ कलेक्शन स्पाई यूनिवर्स की किसी भी फिल्म के पहले दिन से भी कम है — पठान ने Day 1 पर ₹57 करोड़ कमाए थे।
- समस्या आलिया भट्ट की स्टार-पावर नहीं, बल्कि स्पाई यूनिवर्स की क्रिएटिव थकान और रिपीटेटिव फॉर्मूला है जिसने दर्शकों का भरोसा कमज़ोर किया।
- अगर पहले हफ़्ते ₹50 करोड़ भी नहीं आए, तो YRF को स्पाई यूनिवर्स की आगामी क्रॉसओवर फिल्मों पर पुनर्विचार करना होगा।
- ₹150-200 करोड़ के अनुमानित बजट पर ब्रेक-ईवन अब लगभग असंभव दिखता है।
आँकड़ों में
- 'अल्फा' ने दो दिनों में ₹20 करोड़ नेट कमाए — पठान का Day 1 अकेले ₹57 करोड़ था (Bollywood Hungama/Pinkvilla)।
- नेशनल चेन्स में ओपनिंग डे पर करीब 35,000 टिकटें बिकीं (Bollywood Hungama)।
- 'धुरंधर: द रिवेंज' 50 दिनों में ₹977 करोड़ नेट पर पहुँची — दर्शक सिनेमाघर जा रहे हैं, बस 'अल्फा' के लिए नहीं (Pinkvilla)।